झांसी। बुंदेलखंड में भी पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) अपने पांव जमाने में जुटा था। पुलिस की शुरूआती जांच में इसकी पुष्टि हुई है कि शिक्षण संस्थानों के जरिए पीएफआई यहां पैठ बनाने की कोशिश में था। प्रारंभिक पड़ताल में मालूम चला है कि लखनऊ एवं बाराबंकी में पकड़े गए पीएफआई कार्यकर्ता बुंदेलखंड के 17 विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के संपर्क में थे। अब पुलिस इसे पुख्ता करने के लिए पूरी कुंडली खंगालने में जुटी है हालांकि पुलिस अफसरों का कहना है बुंदेलखंड में यह संगठन अभी एक्टिव मोड में नहीं था।
देश विरोधी अभियान चलाने के आरोप में केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े संगठनों पर पांच साल की पाबंदी लगा दी। सरकार के इस कदम के बाद से पुलिस ने स्थानीय स्तर पर इनकी गतिविधियों की बारीकी से पड़ताल शुरू कर दी है। प्रारंभिक पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मालूम चला कि बुंदेलखंड में झांसी समेत जालौन, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट में पीएफआई से जुड़े संगठन कुछ समय से पांव जमाने की कोशिश में जुटे थे। इसके खातिर पीएफआई ने शिक्षण संस्थानों को खास तौर से चुना था। छात्र, युवा, महिलाओं, वकीलों एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के माध्यम से आम लोगों में पैठ बनाने की कोशिश हो रही थी। एक टूल किट के जरिए उनको देश के खिलाफ काम करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार करने का प्रयास था। पुलिस को यह बात लखनऊ और बाराबंकी में कार्यकर्ताओं के हत्थे चढ़ने के बाद मालूम चली। पता चला कि पिछले आठ महीने के भीतर इनमें से दो युवक बुंदेलखंड आए थे। युवकों ने यहां की कुल 17 शिक्षण संस्थानोें का दौरा किया। कई लोगों से मुलाकात की थी। बुंदेलखंड में संगठन को सक्रिय करने के लिए एरिया कमांडर तलाशा जा रहा था हालांकि खोज पूरी होने से पहले ही आरोपी युवक पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
भड़काने में टूल किट का इस्तेमाल
देश विरोधी अभियान चलाने में पीएफआई कार्यकर्ता जिस टूल किट का इस्तेमाल करते थे उसमें कई किताबों का जिक्र है। पहचान छुपाकर अपनी ऑनलाइन आईडी बनाने के तरीके बताए जाते थे। पुलिस का कहना है कि रिहैव फाउंडेशन, नेशनल कंफेडेशन ऑफ ह्ययूमन राइट्स, कैंपस फ्रंट की गतिविधियां यहां पाई गई हैं।
पूरे जोन को सतर्क कर दिया गया है। सर्विलांस को भी निगरानी पर लगाकर पड़ताल कराई जा रही है हालांकि अभी की जांच पड़ताल में इन संगठनों की कोई बड़ी सक्रियता नहीं पाई गई।
जोगेंद्र कुमार
डीआईजी