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Jhansi News: कम पानी पीने से पतली नसों के लोग आ रहे लकवा की चपेट में

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। गर्मी में कम पानी पीने से पतली नसों वाले लोग लकवा (पक्षाघात) की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लकवा का रोगी ढाई घंटे में अस्पताल पहुंचता है तो अच्छी रिकवरी होती है। देरी पर रिकवरी के इंजेक्शन से नुकसान होता है। रोजाना औसतन तीन मरीज आ रहे हैं।



मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. जकी सिद्दीकी
ने बताया कि लकवा की वजह नसों में ब्लॉकेज अथवा पतली नसों का सूखना होता है। इमरजेंसी में आने वाले लकवा के 80 फीसदी रोगियों की नसें पतली होने से लकवा हुआ। गर्मी में इन रोगियों की संख्या बढ़ने की वजह कम पानी पीना है।
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उन्होंने बताया कि यदि किसी को लकवा होता है तो तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। लकवा के रोगियों को ढाई घंटे के अंदर दवा लग जानी चाहिए। यदि तीन घंटे से ऊपर समय होता है तो फायदा पहुंचाने वाली दवा घातक हो जाती है।



पतली नसों से होने वाली दिक्कत

चोट लगने से नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।



सीसा या पारा के संपर्क में आने से नुकसान होता है।

अंगों में सुन्नता या झुनझुनी महसूस होती है।



मांसपेशियों में ऐंठन या मरोड़ होती है।

ये करना चाहिए

नियमित व्यायाम करने से नसों में रक्त का प्रभाव सुचारू रहता है



न सिर्फ रक्त प्रभाव सही रहता है बल्कि ब्लॉकेज नहीं होता है।

डायबिटीज, शुगर व मोटापा के रोगी खासतौर पर व्यायाम करें
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