अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पहले से ही पक्के मकान में रह रहे लोग पीएम आवास योजना के तहत जरूरतमंदों का हक छीनना चाहते थे। शुरुआती जांच में ऐसे 30 फीसदी आवेदनों को बाहर कर दिया गया है। इसमें ऐसे भी लोग हैं, जो पहले योजना का लाभ ले चुके हैं।
पीएम आवास योजना के तहत लाभार्थी को घर बनाने के लिए सरकार किस्तों में ढाई लाख रुपये देती है। योजना का लाभ लेने के लिए पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन दोनों लिए जाते थे मगर पीएम आवास योजना शहरी 2.0 में केवल ऑनलाइन आवेदन ही मान्य है। अब तक झांसी जनपद में 13 हजार से ज्यादा लोग नए वेब पोर्टल पर पीएम आवास के लिए आवेदन कर चुके हैं। योजना में महिलाओं, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर्स, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समेत अन्य को प्राथमिकता दी जानी है। ऐसे में डूडा कार्यालय से 5757 आवेदन पत्रों को जांच के लिए नगर पंचायत, नगर पालिकाओं, नगर निगम को भेजा जा चुका है।
अब तक जांच में नगर पंचायत बड़ागांव में 29 फीसदी और कटेरा में 39 प्रतिशत, नगर पालिका बरुआसागर में 23 फीसदी अपात्र मिल चुके हैं। डूडा की परियोजना अधिकारी रोली गुप्ता ने बताया कि सबसे ज्यादा अपात्रों में पहले से ही पक्के मकान में रह रहे लोग हैं। इसके अलावा सीमा क्षेत्र से बाहर, पूर्व में लाभान्वित, जमीन न होने पर भी कई अपात्र हुए हैं। आवेदन पत्रों की लगातार जांच की जा रही है। 31 मार्च तक ढाई हजार पात्रों की सूची शासन को भेजनी है।
ये है पात्रता का मानक
- तीन लाख से कम आय हो
- कहीं और दूसरा कोई मकान न हो
- गिराऊ या कच्चा मकान तुड़वाकर भी नया बनवा सकते हैं