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ताजियों को देखने के लिए उमड़े लोग

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ताजियों को देखने के लिए उमड़े लोग
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झांसी। मोहर्रम की नौ तारीख पर सोमवार को लोगों ने इमामबाड़ों में रखे ताजियों के दीदार किए। शहर के कई मशहूर ताजियों पर लोगों ने हजरत इमाम हुसैन के नाम पर फातिहा कराई। इस दौरान कई स्थानों पर अखाड़ों का प्रदर्शन किया। साथ ही जगह-जगह लंगर व शर्बत वितरित किया गया।
इराक में कर्बला के मैदान में यजीद की फौजों ने हजरत इमाम हुसैन समेत उनके 72 साथियों को शहीद कर दिया था। हजरत इमाम हुसैन की शहादत सन् 61 हिजरी में दस मोहर्रम को हुई थी। इसी के बाद से हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिये और अलम के जुलूस निकाले जाते हैं। शहर के राई के ताजिये पर भी काफी भीड़ रही। मेवातीपुरा के इमामबाड़ों पर ताजिये और बुर्राख जियारत के लिए रखे गए। इसके लिए इमामबाड़ों में भी खूब सजावट की गई थी। तमाम लोगों ने लोगों के लिए लंबर भी किया। देर रात तक लोगों का यहां पर मजमा लगा रहा। पुरानी पसरट में रहीम भाई की बुर्राख भी देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। इसे सोने के गहनों से सजाया गया। सीपरी बाजार में कांजी बाबा की दरगाह के पास ताजिया सजाया गया। लंगर और शर्बत का वितरण किया गया। इस मौके पर शेरे हसन, इसलाम, भूरे, मुनव्वर ताहिर आदि मौजूद रहे। गंधीगर टपरा चौराहे के पास करीब बख्श का ताजिया सजाया गया। गरिया फाटक, प्रेमनगर में भी जगह-जगह ताजिये रखे गए और लंगर किया गया। इसे देखने के लिए देर रात तक लोगों की भीड़ लगी रही। इसके अलावा सीपरी बाजार में जामा मस्जिद के पास ताजिया सजाया गया। सीपरी बाजार छोटी माता मंदिर के पास, भांडेरी गेट के पास इमामबाड़े पर ताजिया रखा गया। चार खंभा, इतवारी गंज के इमामबाड़े में बुर्राख सजाई गई। शहर के कई हिस्सों में अखाड़ों ने जंगी जौहर दिखाए। कई स्थानों पर जिक्रे इमाम हुसैन के जलसे का भी आयोजन किया। इसमें भी उलमा ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत बयान की। इसके अलावा यौमे आशूरा के रोजों की भी अहमियत बताई। उलमा ने कहा कि हम सब को इमाम हुसैन की शहादत से सबक लेना चाहिए। उन्होंने बदकार यजीद से बैत नहीं की। इस्लाम के लिए शहादत कुबूल कर ली।
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यौमे आशूरा आज, ताजिये होंगे सुपुर्देआब
मंगलवार को यौमे आशूरा को शहरभर के इमामबाड़ों में रखे ताजिये सुपुर्देआब किए जाएंगे। शिया हजरत भी सुबह मातम के बाद ताजियों को सुपुर्देआब करेंगे। इसके अलावा घरों में हजरत इमाम हुसैन के नाम फातिहा कराया जाएगा। घरों में पकवान बनाकर गरीबों को भी तकसीम किया जाएगा। घरों में शहादतनामें भी पढ़े जाएंगे। इस दिन रोजा रखने की भी बहुत अहमियत है। ताजियों का जुलूस गंधीगर का टपरा से शुरू होकर लक्ष्मीताल स्थित करबला में तक जाएगा। जहां पर ताजियों को ठंडा किया जाएगा। साथ ही इतवारी गंज स्थित नूर मंजिल से मातमी जुलूस को निकाला जाएगा, जो नरिया बाजार, गंधीगर का टपरा, बिसाती बाजार, बड़ा बाजार से होता हुआ लक्ष्मी ताल पर खत्म होगा। इसके लिए लोगों के साथ ही प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
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