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कैमरे बंद रखने पर 43 कॉलेजों पर जुर्माना

Fri, 13 May 2016 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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bu, jhansi news - फोटो : demo
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में वार्षिक परीक्षा में दस या उससे अधिक बार सीसीटीवी कैमरे बंद रखने पर 43 कॉलेजों पर 20 से 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।   वहीं, परीक्षा की दो कॉपियों के पेज फटे पाए जाने पर सीएस से रिपोर्ट मांगी गई है।  
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय सत्र 2014-15 से संबद्ध कॉलेजों की परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरे की निगाह में कराता आ रहा है, इस सत्र की परीक्षा भी सीसीटीवी कैमरों से लैस कक्षों में संपन्न कराई गई। परीक्षा के पूर्व ही सीसीटीवी कैमरे बंद रखने वाले केंद्रों पर जुर्माना लगाने के निर्देश दे दिए गए थे। इसके बावजूद कैमरे बंद रखने वाले बुंदेलखंड के अलग-अलग जनपदों के 43 कॉलेजों पर अर्थदंड लगाया गया।

इसमें दस से बीस बार कैमरे बंद रखने वाले 25 कॉलेजों पर पंद्रह हजार, बीस से तीस बार कैमरे बंद रखने वाले 12 कॉलेजों पर बीस हजार और चालीस से अधिक बार कैमरे बंद रखने वाले छह कॉलेजों पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा कुलसचिव वीएन सिंह ने बताया कि फरवरी 2013 में परीक्षा कार्यों से डिबार की गई ललित कला संस्थान की एक शिक्षिका को तीन साल हो जाने के बाद पुन: परीक्षा कार्यों के लिए बहाल कर दिया गया है।
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वहीं, पर्यावरण विषय के नंबर नहीं चढ़ने के सन 2006 के मामलों को असिस्टेंट रजिस्ट्रार परीक्षा व गोपनीय को निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा भी ऐसे दूसरे मामलों को दोनों एआर को अपने स्तर से निपटाने को कहा गया।

बैठक में सामने आया कि दो परीक्षार्थियों की कॉपियों के पन्ने फटे हुए थे। एक कॉपी में एक तो दूसरे के सात पन्ने फटे थे। मूल्यांकन प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में केंद्र अध्यक्ष (सीएस) से रिपोर्ट तलब कर ली गई है। सीएस की रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित महाविद्यालय शिक्षक एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. शारदा सिंह द्वारा कुछ समय पूर्व बीयू प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई थी 75 फीसदी आंतरिक और 25 फीसदी बाहरी परीक्षकों से मूल्यांकन कराया जाए। परीक्षा समिति ने इसको विचारणीय न मानते हुए मांग खारिज कर दी है।

35 का पूर्णांक, प्राप्तांक 36
कॉपियों की जांच में परीक्षक कितनी गंभीरता रखते हैं, इसका खुलासा भी परीक्षा समिति की बैठक में हुआ। एमएससी केमेस्ट्री की एक छात्रा का 35 नंबर का तृतीय सेमेस्टर का पेपर था। परीक्षक ने कॉपी जांचते समय पूर्णांक तक का ध्यान नहीं रखा और छात्रा को 36 नंबर दे दिए। स्कैनिंग कमेटी ने देखा तो छात्रा के 26 नंबर आए थे। इस मामले में परीक्षक को दस साल के लिए मूल्यांकन से डिबार कर दिया गया है।
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