आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कर्ज में फंस गई हैं। इन ग्रामीण महिलाओं से महामारी के दौरान मास्क बनवाए गए। इसके जरिए उनको रोजगार दिलाने का भरोसा दिलाया गया। महिलाओं ने कर्ज लेकर घरों में मास्क बनाए।
करीब छह लाख रुपये के मास्क सभी ब्लॉक की पंचायतों को भेजे गए। लेकिन, दो महीने बाद भी पंचायती राज विभाग भुगतान नहीं कर सका है। भुगतान न मिलने से यह महिलाएं बेहद मायूस हैं।
कोविड महामारी के दौरान बड़ी संख्या में मास्क की जरूरतों को देखते हुए स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं से मास्क बनवाए गए। ग्रामीण स्वत रोजगार महकमे ने इसके लिए 129 समूहों से 233 महिलाओं को चुना। मास्क बनाने के लिए महिलाओं को कपड़े दिए गए लेकिन, धागे एवं सिलाई मशीन का इंतजाम उन्होंने अपनी तरफ से किया। कई महिलाओं के पास मशीन नहीं थी लेकिन, आगे भी काम मिलने के भरोसे में उन्होंने मशीन एवं धागा उधार में ले लिया।
कई दिनों की मेहनत के बाद इन महिलाओं ने 34 हजार मास्क तैयार किए। मई माह में यह मास्क सभी आठों विकास खंड में 2500-5000 तक की संख्या में भेजे गए। इसी तरह नगर निगम, बैंक एवं स्कूलों को भी मास्क दिए गए। अन्य संस्थानों ने तो भुगतान कर दिया लेकिन, पंचायती राज महकमा इन महिलाओं को भुगतान करने को राजी नहीं है।
पिछले दो माह से अपने पैसों के लिए समूह की महिलाएं ब्लॉक एवं पंचायती राज विभाग के चक्कर काट कर परेशान हो चुकी हैं लेकिन उनको भुगतान नहीं किया जा रहा। अब समूह के पास पैसा न होने की वजह से यह महिलाएं दूसरा काम भी नहीं कर पा रही हैं।
इस संबंध में डीपीआरओ जगदीश राम से बात नहीं हो सकी जबकि उपायुक्त स्वत रोजगार डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र का कहना है इस बारे में कई बार पत्र पंचायती राज विभाग को भेजा जा चुका। जल्द ही समूह की महिलाओं को भुगतान कराने की कोशिश की जाएगी।