झांसी। उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति सम्मेलन में राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि शोध के लिए अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रयोगशालाएं होनी चाहिए। कई विश्वविद्यालयों द्वारा वेबसाइट पर कुलाधिपति की अनुमोदित फोटो व बायोडाटा संशोधित नहीं करने पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई। साथ ही भ्रष्टाचार के आरोप में एक कुलपति पर कार्रवाई की बात कह कुलपतियों को चेताया।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के काउंसिल हॉल में सम्मेलन के दौरान राज्यपाल ने कहा कि राजभवन से भेजे पत्रों के समय से निस्तारण के लिए विश्वविद्यालयों में नोडल अधिकारी नामित नहीं है। छात्रों, यूनिवर्सिटी कर्मियों, लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए समय निर्धारण का पालन नहीं किया जा रहा है। कुलपति सम्मेलनों में लिए गए फैसले के अनुसार गठित समितियों द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने चेताया कि भ्रष्टाचार के आरोप में एक कुलपति और एक कुलसचिव को निलंबित किया गया है। इसकी जांच चल रही है। उन्होंने सभी कुलपतियों से पारदर्शिता और निष्ठा से कार्य करने की बात कही। उच्च स्तरीय शोध का वातावरण बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि चांसलर एवॉर्ड के लिए तय मानकों में शोध के भी अंक तय हैं। इस दौरान कार्य परिषद की बैठक की ऑडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग के निर्देश दिए गए। राज्यपाल की प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर ने कहा कि रिक्त पदों पर नई नियुक्ति करने से पहले वरिष्ठता का ध्यान रखें। वरिष्ठता सूची जब तक निस्तारित नहीं हो जाती है, तब तक रिक्तयां पूर्ण न की जाएं। इस दौरान राज्यपाल ने 14 अगस्त को बीयू में होने वाली एलुमिनाई मीट के लोगो का अनावरण किया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे समेत सभी राज्य विश्वविद्यालयों के वीसी मौजूद रहे।
मूल्यांकन प्रणाली में सुधार की रिपोर्ट सौंपी
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए कुछ माह पूर्व समिति गठित की गई थी। इसका जिम्मा आगरा विश्वविद्यालय को सौंपा गया था। शनिवार को कुलपति सम्मेलन में जब समिति की रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति ने राज्यपाल को रिपोर्ट सौंप दी। हालांकि, रिपोर्ट की सिफारिशों को अभी बताया नहीं गया है। राजभवन रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद इसकी सिफारिशों को विश्वविद्यालयों में प्रभावी कर सकता है।