झांसी। तीन करोड़ रुपये का बीमा क्लेम हासिल करने के बाद पवन की चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी कराने की तैयारी थी। इसके लिए उसने प्लास्टिक सर्जरी के विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क भी शुरू कर दिया था। लेकिन, उसका ये प्लान हकीकत में नहीं बदल पाया। दोस्त की हत्या के बाद उसने कोटा पहुंचकर पिता को अपने जिंदा होने की सूचना व्हाट्सएप कॉल के जरिये दी थी। पुलिस की पकड़ में आने से बचने के लिए वो लगातार यू ट्यूब से तरीके सीखता रहा। लेकिन, इसकी चालाकी चल नहीं पाई।
ओरछा थाना इलाके के वनगाय गांव के पास 19 मार्च को एक अधजली लाश मिली थी। मृतक की पहचान बबीना निवासी सीताराम राजपूत के पुत्र टीवीएस बाइक के सब डीलर पवन राजपूत (32) के रूप में हुई थी। पिता ने मृतक का शव अपने बेटे का बताते हुए ओरछा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। माना जा रहा था कि बदमाशों ने लूट के बाद युवक लाश को ठिकाने लगाने के लिए जला दिया। इस घटना से क्षेत्र में सनसनी मच गई गई थी। मामले की पड़ताल के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि पवन राजपूत ने कई कंपनियों से अपना तीन करोड़ रुपये का बीमा करा रखा है। पुलिस के जांच के बिंदुओं में हैसियत से अधिक बीमा पॉलिसी कराना भी शामिल हो गया।
पुलिस जब मामले की गहराई में पहुंची तो सामने आया कि पवन राजपूत के खाते से 29 मार्च को भोपाल में एटीएम से चालीस हजार रुपये निकाले गए। इसके अलावा ये भी सामने आया कि घटना के बाद पवन के पिता सीताराम के मोबाइल पर राजस्थान के कोटा से लंबी बातचीत हुई है। पुलिस ने पवन के पिता पर भी नजर रखना शुरू कर दी। पिता पुत्र का बीमा क्लेम हासिल करने के लिए तेजी के साथ दस्तावेज इकट्ठा कर रहा था।
इसी बीच पुलिस को मुखबिर तंत्र से पवन को बबीना के आसपास देखे जाने की सूचना मिली, जिसके आधार पर पुलिस ने बुधवार को दिन में करीब एक बजे बबीना रोड पर स्थित बुंदेला बाबा मंदिर के पास से पवन राजपूत को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पवन राजपूत ने बताया कि उसने बीमा के तीन करोड़ पाने के लिये खुद की हत्या की झूठी साजिश रची थी और घटना को अंजाम देने के बाद झांसी से ट्रेन के द्वारा इंदौर भाग गया था। वहां से वो कोटा पहुंचा और एक रेस्ट हाउस में रहा। बीमा के कागजात के सिलसिले में लॉक डाउन के दौरान बस के माध्यम से बबीना अपने घर आया था।
पैसे के लिए दोस्त का किया कत्ल
झांसी। पवन राजपूत की दतिया जिले के पखरा निवासी नीरज परिहार से खासी दोस्ती थी। अक्सर दोनों साथ मिलकर पार्टियां मनाते थे। 18 मार्च को पवन अपने दोस्त नीरज को ऐसी ही एक पार्टी मनाने के लिए ले गया था। दोस्त के प्रस्ताव पर पवन भी खुशी - खुशी राजी हो गया था। उसे इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि दोस्त उसका कत्ल करने जा रहा है। पवन ने पहले नीरज को जमकर शराब पिलाई और जब वह मदहोशी में डूब गया तो उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। शव की पहचान न हो, इसके लिए उसे पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
फुल प्रूफ था खुद की हत्या का षणयंत्र
झांसी। पवन राजपूत ने खुद की हत्या का फुल प्रूफ प्लान तैयार किया था। दोस्त की हत्या के बाद उसकी लाश के इर्दगिर्द अपने कपड़े, आधार कार्ड और अन्य कागजात छोड़ दिए थे, ताकि शक की कोई गुंजाइश न रहे। पुलिस को उलझाने के लिए पवन राजपूत वारदात में उपयोग की गई कार यूपी 14 ए डब्लू 7040 को झांसी रेलवे स्टेशन के पास छोड़कर फरार हो गया था। वारदात के बाद पवन कोटा में नाम बदलकर रहा। इसके लिए उसने कागजात घटना से पहले ही तैयार कर लिए थे।
बगैर आवाज के अपराधी तक पहुंची पुलिस
झांसी। इस घटना के बाद से पुलिस इस मामले में बयानबाजी से बचती रही। पुलिस टीम चुप्पी साधकर अपने मिशन पर लगी रही। हैसियत से अधिक तीन करोड़ का बीमा पुलिस को शुरुआत से ही नहीं पच रहा था। फिर घटना के बाद पवन के एटीएम से चालीस हजार की निकासी, पवन के पिता की कोटा में लंबी बातचीत और बीमा क्लेम हासिल करने के लिए पिता की सक्रियता, ये सारे बिंदुओं को पुलिस कड़ी दर कड़ी जोड़ती रही। पुलिस की यही रणनीति अपराधी को उसके मुकाम तक पहुंचाने में बड़े मददगार साबित हुए।
पुलिस टीम को मिलेगा इनाम
झांसी। मामले का खुलासा करने में निवाड़ी एसडीओपी बीएस परिहार, थाना प्रभारी नरेंद्र त्रिपाठी, उप निरीक्षक गौरव राजौरिया, प्रधान आरक्षक करन सिंह बुंदेला, मनोज तिवारी, पवन कौरव, आकाश कौरव, रोहित सेंगर, अरविंद यादव की विशेष भूमिका रही। मामले के खुलासे पर पुलिस अधीक्षक मुकेश श्रीवास्तव ने 20 हजार के इनाम से पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की।