फैल रही जानलेवा बीमारियों के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने अलर्ट जारी किया है, लेकिन मेडिकल कालेज में मरीजों के हाल-बेहाल हैं। डेंगू वार्ड में वायरल और अन्य रोगों से ग्रसित मरीज भी भर्ती हैं। दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नवनीत सिंह चहल ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया और बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पकड़ी थीं तो वहां कुछ सुधार हो गया। दूसरी तरफ, मेडिकल कालेज में मरीजों के इलाज के पुख्ता बंदोबस्त नहीं हैं। डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड तो बना दिया पर वहां चिकुनगुनिया, वायरल और मलेरिया के भी 35 मरीज हैं। डेंगू के दो मरीज भर्ती हैं। वहां न तो मच्छरदानी लगाई गई है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त है। डेंगू का अलग वार्ड इसलिए बनाया गया कि संक्रमण से मरीजों को बचाया जा सके पर यहां इसका ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
मेडिसिन वार्ड में भर्ती संदीप ने बताया वह सोमवार को आए थे। उसी दिन 900 रुपये और मंगलवार को 1,080 रुपये की दवाएं बाहर खरीदनी पड़ीं। खून की जांच के नाम पर 150 वसूल लिए गए। इसके पहले निजी क्लीनिक में भी 630 रुपये खर्च चुके हैं। मेडिसिन वार्ड में भर्ती रघुवीर ने बताया कि उन्हें हार्ट की बीमारी है। दो दिन से भर्ती हैं। बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। दिन में दो इंजेक्शन लगाए जाते हैं। एक की कीमत 320 रुपये है। गरीब हूं, इतना मंहगा इलाज ज्यादा दिन तक नहीं करवा सकता। कोई सुनने वाला नहीं है।
दावा
डेंगू मरीजों पर निगाह रखी जा रही है। अन्य मरीजों को भी डेंगू वार्ड में रखा जा सकता है। नहीं पता कि डेंगू के कितने मरीज भर्ती हैं। इलाज के बेहतर इंतजाम हैं। पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। यदि कोई डाक्टर बाहर से दवाएं खरीदने को कहता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
हरीश आर्या
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कालेज