झांसी। बुंदेलखंड के एक वैज्ञानिक का दावा है कि उसने बिना ईंधन की मदद से चलने वाले इंजन का आविष्कार कर लिया है। मॉडल बनाने के लिए आ रही आर्थिक अड़चन को दूर करने के लिए वह आर्थिक मदद के लिए सरकार व अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
जालौन जिला के गांव सिरसा दोगढ़ी निवासी रामकेश शाक्यवार ने बताया कि 15 वर्षों से इस खोज में लगे हुए थे, जिससे यह सिद्धांत निकल कर आया है। इस खोज में कई समीकरणों व सर्किल की मदद से सफलता मिली है। इससे बिना ईंधन के वाहन चलाना संभव होगा। उन्हाेंने बताया कि कई बार उन्हें वैज्ञानिकों ने सिद्धांत समझाने के लिए बुलाया, लेकिन वह मॉडल को गोपनीय रखना चाहते हैं जिससे कोई दुरुपयोग नहीं कर सके। उनका कहना है कि कोई जिम्मेदार व्यक्ति यदि मॉडल को देखने के लिए बुलाता है तो वह पूरी प्रक्रिया बताने को तैयार हैं। इस संबध में प्र्रधानमंत्री से लेकर कई मंत्रियों, क्षेत्रीय नेताओं व अधिकारियों को आर्थिक सहायता के लिए गुहार लगाई, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है।
रामकेश का दावा है कि इस आविष्कार से देश और दुनिया को वायु प्रदूषण और ऊर्जा की समस्या से राहत मिलेगी। देश के विदेशी मुद्रा कोष की भी बचत होगी। उनका कहना है कि सरकार राष्ट्रहित में एक बार बुलाकर सिद्धांत का परीक्षण करे, ताकि देश को एक नया आविष्कार मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार यदि मदद करती है और उन्हें इस प्रयोग में सफलता नहीं मिलती है तो वह कोई भी सजा भुगतने को तैयार हैं।