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नर्स की लापरवाही से बिगडी थी मरीजों की हालत

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नर्स की लापरवाही से बिगड़ी थी मरीजों की हालत
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झांसी। जिला अस्पताल में रविवार की रात महिला वार्ड में भर्ती बारह मरीजों की हालत बिगड़ने के मामले की जांच में प्रथम दृष्टया स्टाफ नर्स की लापरवाही सामने आई है। उसने मरीजों को डिस्टिल वॉटर की जगह नार्मल सेलीन का इंजेक्शन लगा दिया था। इस पर मंडलीय प्रमुख अधीक्षक बलवीर कृष्ण गुप्ता ने जांच के बाद उसे हटाकर एनएचएम लखनऊ से संबद्ध कर दिया है। अब सभी मरीजों की हालत ठीक है।
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जिला अस्पताल में भर्ती कोतवाली के उन्नाव गेट बाहर अभिलाषा , कौशल्या , अनुष्का , प्रियंका, मसीहागंज स्थित नाथ की कोठी निवासी कमला देवी, ग्वालियर मार्ग निवासी सौफिया, पुलिया नंबर नौ निवासी आयशा, मेवातीपुरा निवासी ममता, गुदरी मोहल्ला निवासी अंजली , इतवारी गंज निवासी शमीम, शिवाजी नगर निवासी शबनम मंसूरी समेत एक अन्य महिला मरीज वार्ड में भर्ती थी। रात करीब साढ़े नौ बजे चिकित्सक के राउंड पर जाने के बाद स्टाफ नर्स ने सभी मरीजों को इंजेक्शन लगाना शुरू किया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर के भीतर सभी मरीजों को ठंड, बुखार व घबराहट होने की शिकायत होने लगी। एक साथ बारह मरीजों की हालत बिगड़ने पर तीमारदारों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया था। किसी तरह स्टाफ नर्सों ने बात संभालने का प्रयास किया था, लेकिन तीमारदारों ने अस्पताल में काफी हंगामा किया था। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचित किया था। मौके पर पहुंची पुलिस ने अस्पताल में हंगामा कर रहे तीमारदारों को किसी तरह समझाबुझा कर शांत कराया था। सोमवार को मरीजों की हालत में सुधार पाया गया है। अस्पताल के मंडलीय प्रमुख अधीक्षक बलबीर कृष्ण गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद हालत बिगड़ने लगी थी जिसकी बारीकी से जांच करने पर पता चला कि मौजूद नर्स ने डिस्टिल वॉटर की जगह नॉर्मल सेलीन में इंजेक्शन को लगाया था, वह खुला रखा था। इस प्रकरण में नर्स को हटा कर नेशनल हेल्थ मिशन (लखनऊ) भेजा गया है। बर्खास्तगी की कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को पत्र लिख दिया गया है।
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