बारिश के मद्देनजर पुराने तालाबों के कायाकल्प के लिए गांवों में पानी पंचायत का गठन किया जाएगा। दस सदस्यीय इस कमेटी में महिलाओं को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। पानी पंचायत श्रमदान से तालाबों की सफाई कराकर किनारे पौधे लगवाकर उनका रखरखाव करेगी। यह जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग को सौंपी गई है।
‘पानी पंचायत’ कमेटी के सदस्य तालाबों के आसपास रहने वाले ग्रामीण होंगे। इसमें महिलाओं की भागीदारी रहेगी तथा 10 से 20 प्रतिशत पुरुष ही शामिल होंगे। तालाब की खुदाई मानक के अनुरूप हो, तालाब के किनारे आवश्यकतानुसार पौधे लगाए जाएं, इसकी जिम्मेदारी पानी पंचायत की होगी। पानी पंचायत में कुम्हार कला और मछली पालन से जुड़े लोगों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी शामिल किया जाएगा। इसमें भूजल सेना और ग्राम पंचायत की जल संसाधन समिति का भी सहयोग लिया जाएगा। प्रमुख सचिव मोनिका एस. गर्ग ने शासनादेश जारी कर ‘पानी पंचायत’ का गठन करने के निर्देश दिए हैं।
ये जिम्मेदारी
पानी का सही उपयोग हो, इसके लिए क्या सुधार किये जा सकते हैं, इसका सुझाव पानी पंचायत ग्राम पंचायत को देगी। तालाब की सफाई के लिए श्रमदान, तालाब में गंदा पानी जाने से रोकने और कचरा डाले जाने पर रोक लगाने का अधिकार पानी पंचायत को होगा। पानी के उपयोग में यदि कोई विवाद होता है तो पानी पंचायत उसे निपटाने में सहयोग करेगी।
ऐसे होगा गठन
पानी पंचायत में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और पांच सदस्य होंगे। अध्यक्ष संगठन की बैठक बुलाएगा। पानी पंचायत के सदस्यों की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होगी। पंचायत की खास बात यह रहेगी कि कोई भी सदस्य किसी राजनीतिक दल का सदस्य न हो।
बरसात के पानी का संरक्षण होगा
‘पानी पंचायत’ के गठन का उद्देश्य बरसात के पानी का अधिक से अधिक संचय करना, तालाबों की सुरक्षा, पौधरोपण करना, मछली पालन और कुम्हारी कला के माध्यम से जीवकोपार्जन के साधन विकसित करना है। इसका गठन जल्द किया जाएगा।
- डीपी वर्मा
अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई।