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मुकदमा दर्ज होने से पहले ही फरार हो गया था पाली थानाध्यक्ष

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झांसी। पाली थाने में किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का आरोपी थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज मुकदमा दर्ज होने से पहले ही फरार हो गया था। थाना परिसर में जिस कमरे में वह रहता था उस पर ताला लगा दिया था। खास बात यह है कि एसओ की फरारी को थाने का स्टाफ घंटों छुपाए रहा। यहां तक की ललितपुर पुलिस के आला अफसर भी इससे अनजान बने रहे। एडीजी कानपुर भानू भास्कर ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
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दरअसल आरोपी थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज के खिलाफ मंगलवार की दोपहर को 2 बजे मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन उससे पहले ही वह फरार हो गया था। इससे साफ है कि उसे पूरी कार्रवाई की जानकारी थी। इतना ही नहीं जिस कमरे में वह रहता था वहां पर भी ताला लगा दिया गया था। थाना परिसर से वह आसानी से निकल गया लेकिन थाने के स्टाफ को इसकी जानकारी नहीं हुई। जब रात को डीआईजी जोगेंद्र सिंह थाने पर पहुंचे तो बताया गया कि थानाध्यक्ष फरार हो गया है। जबकि इससे पहले ललितपुर के आला अफसर बार बार कहते रहे कि थानाध्यक्ष को हिरासत में लिया गया है। इतना ही नहीं कुछ आला अफसर तो इस प्रकार की घटना की जानकारी होने से ही इंकार करते रहे थे। एडीजी कानपुर भानू भास्कर ने भी माना कि पुलिस स्टाफ की भूमिका ठीक नहीं रही है। इसी पर 29 पुलिस कर्मियों के स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है।
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