झांसी। झांसी के गोरामछिया में ऑक्सीजन का पहला प्लांट शुरू करने के लिए कवायद तेज हो गई है। अफसरों की टीम ने मंगलवार को प्लांट के लिए चयनित स्थल का जायजा लिया। औषधि निरीक्षक ने बताया कि कुछ छोटी मोटी कमियां हैं जिन्हें दूर कर लिया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि अगले हफ्ते तक प्लांट का लाइसेंस जारी हो सकता है।
झांसी में अधिकतर मध्य प्रदेश से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। कोरोना वायरस के दौर में एमपी में भी केस बढ़ने की वजह से वहां खपत बढ़ गई है। इस कारण झांसी में मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में कोविड में गंभीर मरीज भर्ती हो रहे हैं, ऐसे में सरकारी अस्पतालों को ज्यादातर ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है। निजी अस्पताल समेत एंबुलेंसों को बमुश्किल ऑक्सीजन मिल पा रही है। अमर उजाला ने लगातार इस समस्या पर खबरें प्रकाशित कीं। औषधि
प्रशासन विभाग ने ऑक्सीजन सप्लायरों से बात करनी शुरू की। विभाग ने प्लांट की स्थापना के लिए संभावना तलाशी। इसके बाद एक सप्लायर गोरामछिया में प्लांट शुरू करने के लिए तैयार हो गया है। उसने प्लांट के लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। मंगलवार को औषधि निरीक्षक उमेश भारती प्लांट देखने के लिए पहुंचे। यहां पर गैस स्टोरेज, फिलिंग क्षेत्र आदि अलग-अलग नहीं मिले। इस पर उन्होंने सभी कमरे अलग-अलग बनाने के निर्देश दिए। अब वह प्लांट का विधिवत निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। संभावना जताई जा रही है कि प्लांट को अगले सप्ताह तक लाइसेंस जारी हो सकता है।
बुंदेलखंड को 50 फीसदी आपूर्ति हो सकेगी
बुंदेलखंड में रोजाना औसतन दो हजार गैस सिलिंडरों की खपत है। इसमें सबसे ज्यादा झांसी में ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। बताया गया कि प्लांट से 1000 गैस सिलिंडरों के बराबर ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकेगी। इस प्लांट से झांसी की ऑक्सीजन को लेकर मध्य प्रदेश पर निर्भरता बेहद कम हो जाएगी। साथ ही पूरे बुंदेलखंड को 50 फीसदी ऑक्सीजन की आपूर्ति झांसी के इस प्लांट से हो सकेगी।