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आपदा को बनाया अवसर, बुंदेलखंड का पहला ऑक्सीजन प्लांट झांसी में शुरू

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झांसी। कोरोना की आपदा में झांसी समेत बुंदेलखंड ने ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बनने का काम किया। झांसी के गोरामछिया में बुंदेलखंड का पहला ऑक्सीजन प्लांट शुरू हुआ। अमर उजाला की तरफ से ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद सरकारी मशीनरी ने इसके लिए कवायद शुरू की। अब इसका लाभ बुंदेलखंड समेत आसपास के जिलों को भी मिलेगा।
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झांसी में अधिकतर मध्य प्रदेश से ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। कोरोना वायरस के दौर में मध्य प्रदेश में भी केस बढ़ने की वजह से वहां खपत बढ़ गई है। इस कारण झांसी में मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पाई। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में कोविड में गंभीर मरीज भर्ती हो रहे हैं ऐसे में सरकारी अस्पतालों को ज्यादातर ऑक्सीजन की सप्लाई होने लगी।
निजी अस्पताल समेत एंबुलेंसों को बमुश्किल ऑक्सीजन मिल पा पाई। अमर उजाला लगातार इस समस्या को उठाता रहा। इसके बाद औषधि प्रशासन विभाग ने ऑक्सीजन सप्लायरों से बात करनी शुरू की। विभाग ने प्लांट की स्थापना के लिए संभावना तलाशी। एक सप्लायर गोरामछिया में प्लांट शुरू करने के लिए तैयार हो गया है। उसने प्लांट के लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। इसके बाद लाइसेंस जारी भी हो गया। औषधि निरीक्षक उमेश भारती ने बताया कि प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू हो गया है।
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अभी प्रदेश में पांच ऑक्सीजन प्लांट
बताया गया कि उत्तर प्रदेश पांच ऑक्सीजन प्लांट लगे हुए हैं। इसमें कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा आदि शामिल हैं। अब झांसी में शुरू होने के बाद यूपी में ऑक्सीजन उत्पादन करने वाले प्लांट की संख्या छह हो गई।
बुंदेलखंड में रोज दो हजार सिलिंडरों की खपत
बुंदेलखंड में रोजाना औसतन दो हजार गैस सिलिंडरों की खपत है। इसमें सबसे ज्यादा झांसी में ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। बताया गया कि झांसी में प्रतिदिन एक हजार गैस सिलिंडरों की खपत होती है।
नेचुरल ऑक्सीजन प्लांट में ऐसे बनती है गैस
प्लांट में वातावरण से गैसों को खींचने की क्षमता होती है, जिससे ऑक्सीजन व नाइट्रोजन को खींचा जाता है। इसके बाद नाइट्रोजन को अलग किया जाता है। ऑक्सीजन को फिल्टर करने के बाद कंप्रेस्ड फॉर्म में एक टैंक में रखा जाता है। यहां से सिलिंडरों आदि के जरिए अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है।
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