- स्टांप शुल्क में कमी के 151 मामले
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। स्टांप शुल्क में कमी के 151 मामलों में निबंधन विभाग की 9.76 करोड़ रुपये का बकाया है। इसकी वसूली के लिए विभाग की ओर से एकमुश्त समाधान योजना चलाई जा रही है लेकिन, विभाग डेढ़ माह में योजना के जरिये सिर्फ 22.23 लाख ही वसूल पाया है।
संपत्ति के बैनामों में निर्धारित सर्किल रेट का शहरी क्षेत्र में सात प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में पांच प्रतिशत स्टांप शुल्क वसूला जाता है। 10 लाख रुपये तक की संपत्ति पर महिलाओं को एक प्रतिशत की छूट दी जाती है लेकिन, विभाग की ओर से की गई जांच में 151 बैनामे ऐसे पाए गए, जिनमें संपत्ति की कीमत कम दर्शाते हुए स्टांप शुल्क कम अदा किया गया।
इन बैनामों में विभाग का 9,76,71,363 रुपये बकाया है। इसकी वसूली के लिए विभाग ने एक जनवरी से एकमुश्त समाधान योजना शुरू की थी। इसके तहत बकायेदारों को अर्थदंड के रूप में महज 100 रुपये ही अदा करने होंगे। इसके बावजूद, केवल सात लोगों ने ही इस योजना का लाभ उठाया है। उनसे विभाग को 22,23,157 रुपये की धनराशि ही मिल पाई है। बता दें कि स्टांप शुल्क कम पाए जाने पर चार से दस गुना तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
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एकमुश्त समाधान योजना 31 मार्च तक लागू रहने वाली है। ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठाएं, इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत बैनामे में बचाया गया स्टांप शुल्क के अलावा महज 100 रुपये जुर्माना ही अदा करना होता है। - प्रवीण कुमार सिंह, सहायक महानिरीक्षक निबंधन