आठ विकासखंड के कई गांवों में आज भी लोग शौच के लिए जा रहे बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए 10 सालों से अभियान चल रहा है। इसके बावजूद, आठ विकासखंड के कई गांव आज तक पूर्ण रूप से मॉडल गांव नहीं बन सके हैं। कुछ गांवों में अभी भी न तो पर्याप्त सफाई की व्यवस्था है और न ही सार्वजनिक शौचालय बन पाए हैं। जनपद के 288 गांव अभी भी ओपीएफ प्लस नहीं हो सके हैं। हालत यह है कि लोग आज भी यहां खुले में शौच करने को विवश हैं।
प्रधानमंत्री ने दो अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरुआत की थी। उद्देश्य था कि देश साफ-सुथरा रहे और किसी को घर के बाहर खुले में शौच करने न जाना पड़े। इस अभियान पर भारी भरकम राशि खर्च की गई। गांवों में घर-घर शौचालय बनाने का अभियान चलाया गया। कई घरों को शौचालय के लिए धनराशि भी दी। ग्रामीणों को सचेत करने के लिए प्रत्येक गांव में रोको-टोको अभियान भी चलाया गया। बच्चों की वानर सेना भी बनाई गई, जो खुले में शौच करने वाले व्यक्ति को देखकर सीटी बजाती थी। इससे अपमानित होकर लोगों ने अपने घरों में बने शौचालय का इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया पर 10 साल की कवायद के बाद भी जिला शत-प्रतिशत ओडीएफ प्लस (खुले में शौच मुक्त) मॉडल नहीं बना पाया है। जिले की 496 ग्राम पंचायतों में 740 राजस्व ग्राम हैं, जिसमें से 452 राजस्व ग्राम ओडीएफ प्लस घोषित हो चुके हैं और 288 राजस्व ग्रामों अभी पीछे हैं।
बॉक्स में
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विकासखंड : मॉडल गांव
बबीना : 50
बड़ागांव : 50
बामौर : 53
बंगरा : 61
चिरगांव : 69
गुरसराय : 56
मऊरानीपुर : 65
मोठ : 49
जनपद के सभी खंड विकास अधिकारियों से लेकर ग्राम पंचायतस्तरीय कर्मियों को गांवों को ओडीएफ प्लस करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके साथ ही प्रधानों से भी सहयोग मांगा गया है। - बालगोविंद श्रीवास्तव, जिला पंचायतराज अधिकारी