झांसी। मां की कोख से बाहर आने के तुरंत बाद एक बेटी को सर्द रात में सड़क किनारे फेंक दिया गया। मानवता को शर्मसार करने वाले तो अंधेरे में गायब हो गए, लेकिन एक अनजान शख्स ने गंभीर हालत में पड़ी मिली बेटी को बचाने की तमाम कोशिश की, लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाया। इसके बाद बेटी के अंतिम संस्कार के लिए भी कुछ लोग आगे आए और उन्होंने विधिवत रूप से उसे दफनाया।
समाज के एक वर्ग में बेटियों के प्रति नजरिया अब भी नहीं बदला है। इसी का नतीजा है कि जन्म लेने के बाद बेटियों को लावारिस अवस्था में छोड़ दिया जाता है। पिछले डेढ़ साल के दरम्यान इस तरह के आधा दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। शुक्रवार रात भी एक नवजात सड़क किनारे पड़ी पाई गई थी। एरच थाना इलाके के ग्राम बेना सुरवई में सड़क से गुजर रहे किसान कमलेश कुमार को बच्चे के रोने की आवाज आई। यहां-वहां नजर घुमाई तो सड़क किनारे एक नवजात पड़ी पाई। उसकी हालत गंभीर थी। कमलेश तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बावजूद, नवजात की जान नहीं बच पाई। शनिवार की सुबह बेटी को बड़ागांव गेट बाहर मुक्तिधाम में दफनाया गया। संस्था एक छोटी से आशा के इशु उपाध्याय ने बेटी को विधिवत दफनाया। उन्होंने बताया कि विधान के अनुसार अगले पांच दिनों तक बेटी को दफनाए जाने वाले स्थान पर वे कटोरी में दूध रखेंगे व दीपक जलाएंगे।