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फेफड़े की सिकुड़ी नसों को दुरुस्त कर रही निनटेडानिब

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झांसी। जानलेवा कोरोना वायरस कई मरीजों के फेफड़ों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है। वायरस मरीजों के फेफड़े की नसें सिकोड़ दे रहा है। इसी वजह से कई मरीजों की कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आ जाने के बावजूद जान चली जा रही है। अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सिकुड़ी नसों को दुरुस्त करने के लिए निनटेडानिब दवा दी जाने लगी है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
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पुणे के इंस्टीट्यूट में क्लीनिकल ट्रायल में निनटेडानिब के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसके बाद देशभर के अस्पतालों में इस दवा का उपयोग शुरू हो गया है। झांसी के मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों को निनटेडानिब दी जा रही है। इसमें 70 फीसदी मरीजों को लाभ मिला है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि अभी दवा का बड़े स्तर पर शोध नहीं हुआ है। ऐसे में विशेष परिस्थितियों में ही मरीजों को यह दवा दी जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना से पीड़ित होने के बाद संक्रमण से मुक्ति तो मिल जा रही है। लेकिन फेफड़ों में रक्त के थक्के जमने से आई सिकुड़न (फाइब्रोसिस) के चलते बाद में दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। फाइब्रोसिस के चलते सांस लेने में समस्या शुरू होने लगती है। निनटेडानिब दवा फेफड़े की सिकुड़ी नसों को दुरुस्त करने में मददगार साबित हो रही है।
40 हजार की जगह अब 1800 में जेनरिक दवा उपलब्ध
निनटेडानिब की रोज एक डोज मरीज को खाने के लिए दी जाती है। एक महीने तक लगातार चलने वाली इस दवा का खर्च 40 हजार रुपये आता है। मगर अब बाजार में इसका जेनरिक वर्जन भी उपलब्ध हो गया है। जनऔषधि केंद्र पर एक टैबलेट 60 रुपये की पड़ती है। ऐसे में महज 1800 रुपये में महीने भर का उपचार हो जाता है।
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केस-1
सीपरी बाजार निवासी एक व्यक्ति संक्रमित होने के चलते मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भर्ती है। कोरोना के चलते उसके फेफड़े 90 फीसदी तक खराब हो गए। इसके बाद डॉक्टर ने निनटेडानिब दवा देनी शुरू की। दवा के असर की वजह से मरीज की सेहत में सुधार होने लगा। अब मरीज की हालत ठीक है।
केस-2
कोरोना के कारण बड़ाबाजार निवासी एक व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज लाया गया। जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। ऑक्सीजन लेवल भी काफी गिर गया। सीटी स्कैन कराने पर फेफड़े की स्थिति ठीक नहीं मिली। इस पर डॉक्टरों ने निनटेडानिब दवा का इस्तेमाल शुरू किया। सप्ताह भर में ही अच्छे परिणाम दिखने लगे। अब मरीज स्वस्थ है।
अभी निनटेडानिब दवा पर बड़े स्तर पर शोध होना बाकी है मगर शुरूआती स्टेज में बेहतर परिणाम आने के बाद मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को भी यह दवा दी जाने लगी है। 70 फीसदी तक मरीजों को लाभ मिला है। कोरोना से 90 प्रतिशत तक खराब हो चुके फेफड़े ठीक होना शुरू हो गए हैं। - डॉ. जकी सिद्दीकी, फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज।
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