मंडल में कच्ची शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से शराब की भट्ठियां धधक रही हैं। बुलंदशहर में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत के बाद जिले में प्रशासन नहीं चेता। प्रशासन सब कुछ जानकर अंजान है। आबकारी व पुलिस कभी-कभार छापेमारी कर फर्ज अदायगी कर अपनी पीठ थपथपा लेती है।
मंडल के झांसी, ललितपुर व जालौन में कच्ची शराब के रूप में मौत का सामान तैयार किया जा रहा है। इन गांवों में कच्ची शराब बनाने के लिए धड़ल्ले से भट्ठियां धधक रही हैं। बेखौफ कारोबारी पुलिस व प्रशासन को चुनौती देने के अंदाज में अपने काम को अंजाम देने में जुटे हुए हैं। महुए से बनने वाली कच्ची शराब में नशा गहरा करने के लिए ऑक्सिटोसिन व यूरिया मिलाई जाती है। इनके लगातार इस्तेमाल से ये स्लो पाइजन का काम करती है।
ये शराब शरीर के अंगों को एक-एक कर खराब कर मौत तक ले जाती है। बताया गया है कि मंडल में 42 गांवों में कच्ची शराब बनाई जा रही है। इनमें झांसी जिले के 22, जालौन के 11 और ललितपुर के नौ गांवों में कच्ची शराब का अवैध ढंग से निर्माण किया जा रहा है। प्रभारी एसएसपी राहुल मिठास ने बताया कि कच्ची शराब के अवैध कारोबारियों पर प्रतिदिन पुलिस कार्रवाई कर रही है। कई अवैध कारोबारियों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की है।
इन गांवों में धड़ल्ले से फलफूल रहा धंधा
- झांसी जिले में परवई, नयाखेड़ा, गोरामछिया, तैंदोल, महेबा, बम्हरौली, डेरा कृषि फार्म, डेरा समथर, पनारी, भकौरा, बसरिया, कनकना, देवरी सिंहपुरा, रोरा, इटायल, सकरार डेरा, अड़जार, कटेरा, गरौठा डेरा, झबरा, अशोक नगरडेरा व राजापुर।
- जालौन में उमरारखेड़ा, चौरसी डेरा, विरासनी डेरा, कंचड़ कॉलोनी, सिरसा कलार, घुसिया, बसोव, गिरवर, कालपी डेरा, बबीना व चौरासी डेरा।
- ललितपुर में चीरा, मऊमाफी, घटवार, लड़ैयामार धौर्रा, रजौरा, सिद्ध की टोरिया, उगरपुर, टकटकी व गणेशपुरा टपरियन।