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आनलाइन प्लेटफार्म पर छाने को तैयार आरी गांव की झाड़ू

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झाडू बनाती महिलाएं।
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झांसी। घरों की सफाई में इस्तेमाल आने वाली झाड़ू ने आरी गांव की सैकड़ों महिलाओं की किस्मत बदल दी है। अब झांसी के गांव में बनी यह झाडू ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर दस्तक देने को भी तैयार है। ग्रामीण आजीविका मिशन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। झाड़ू के अलावा स्वयं सहायता समूह के निर्मित दूसरे बेहतरीन हस्तनिर्मित उत्पाद जल्द यहां बिक्री को उपलब्ध होंगे।
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बबीना ब्लॉक का आरी गांव अपने यहां बनी झाड़ुओं को लेकर काफी चर्चित रहा है। पूरे गांव की महिलाएं के लिए यह कुटीर उद्योग में तब्दील हो चुका है। आसपास के लोग भी इसे झाड़ू वाले गांव के तौर पर जानते हैं। यहां यह काम करीब डेढ़ साल पहले शुरू हुआ। सबसे पहले गांव की 130 महिलाओें को 13 स्वयं सहायता समूहों के जरिए जोड़ा गया। इसके बाद सभी समूह से महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया। अभी गांव में जय करीला माता, जय संतोषी माता, जय भीम, जय शीतला माता, रतनगढ़ माता, काली माता, सिद्घबाबा जैसे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस काम में जुटी हुए हैं। शुरुआत में यह झाडू सिर्फ झांसी एवं कानपुर के बाजार में भेजी जाती रहीं लेकिन, हाथ से बनी होने के नाते इनकी मांग गुजरात, महाराष्ट्र तक से आनी शुरू हो गई।
जय करीला माता सहायता समूह की सुनीता का कहना है पूरे गांव की महिलाएं एकसाथ यह काम करती हैं। कच्चा माल के तौर पर बेंता का इस्तेमाल होता है जिसे, वह मुस्तरा, ग्रासलैंड, भरारी आदि स्थानों से लेकर आती हैं। रोजाना करीब 5000 झाडू तैयार होती है। इनकी मार्केटिंग का काम भी समूह की महिलाएं ही संभाली हैं। जहां से मांग आती है, वहां तक इसे पहुंचाया जाता है लेकिन, इन महिलाओं का कहना है कि मेहनत के एवज में पैसा कम मिलता है। सुनीता ने बताया दौ सौ झाडू का बंडल 1800-2000 रुपये के बीच बिकता है। लागत आदि निकालने के बाद बचत कम ही होती है लेकिन, अपना काम होने की वजह से सभी महिलाएं इसमें जुटी रहती हैं। अब इनको राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए ई-कार्मस प्लेटफार्म मुहैया कराने की तैयारी की जा रही है। झाड़ू के अलावा स्वयं सहायता समूहों के दूसरे हस्तनिर्मित उत्पाद भी वहां उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें दलिया, बांस की डलिया, सजावटी गुड़िया, चादर, गलीचा आदि भी शामिल हैं।
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स्वयं सहायता समूह के हस्तनिर्मित उत्पादों को बेहतरीन बाजार मिले, इसके लिए इनको ई-कार्मस प्लेटफार्म तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इससे इन महिलाओं के आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
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नागेंद्र नारायण मिश्र, उपायुक्त स्वरोजगार (ग्रामीण)
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