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पांच कोचों को देख रहा एक टीटीई

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झांसी। टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी के कारण मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों के 600 से अधिक कोचों की निगरानी नहीं हो पा रही है। दरअसल, ट्रेनों की संख्या के हिसाब से 1800 टिकट चेकिंग कर्मियाें की आवश्यकता है, जबकि सिर्फ 726 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसमें झांसी स्टेशन पर 517 कर्मचारी कार्यरत हैं। टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी से अधिकांश ट्रेनों में दो या तीन कर्मचारी चल पा रहे हैं। जबकि, कोचों की संख्या के हिसाब से एक ट्रेन में पांच कर्मचारियों का होना जरूरी है। मजबूरन, एक टीटीई को तीन की जगह पांच कोचों को संभालना पड़ रहा है।
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रेल मंडल प्रशासन ने प्रतिदिन 98 ट्रेनों में चलने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए एम्युनिटी डिटेल लिंक बना रखा है। यह स्टाफ झांसी स्टेशन से अप और डाउन की ट्रेनों में निजामुद्दीन, इटारसी, कानपुर और बांदा के लिए चलता है। शताब्दी एक्सप्रेस व वीकली ट्रेनों के लिए अलग-अलग टीमें हैं। इसके अलावा स्पेशल स्क्वाएड और ओपन डिटेल में अलग कर्मचारी तैनात हैं। इस हिसाब से 1800 कर्मचारियों की जरूरत है, जबकि 726 उपलब्ध हैं। साथ ही, हर महीने चार से छह कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इससे संख्या और घटती जा रही है।
नतीजतन, अधिकांश ट्रेनों में वन प्लस टू या थ्री का स्टाफ चल रहा है। नियम के हिसाब से एक टीटीई को तीन स्लीपर या पांच एसी कोच एक साथ देखने पड़ते हैं। जबकि, तीन स्लीपर कोच एक टीटीई के पास होने के हिसाब से टीम में कम से कम वन प्लस फाइव या सिक्स का स्टाफ होना चाहिए। स्टाफ की कमी के कारण एक टीटीई से पांच कोच दिखवाए जा रहे हैं, क्योंकि 22 या 24 डिब्बों की ट्रेन में दो, तीन या चार टीटीई ही चल रहे हैं। साथ ही, ट्रेनों की संख्या के हिसाब से 600 से अधिक कोचों में कोई स्टाफ नहीं चल रहा है। दूसरा, इससे बेटिकट यात्रियों को पकड़ने का अभियान प्रभावित होने से राजस्व की क्षति तो हो ही रही है, यात्रियों को भी परेशानी होती है। मंडल प्रशासन किसी तरह काम चला रहा है।
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जरूरत के हिसाब से टिकट चेकिंग कर्मचारी नहीं हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए मुख्यालय को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही नए कर्मचारी मिलेंगे।
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- अखिल शुक्ला, डीसीएम।
- कोई समस्या आने पर ट्रेेन में टीटीई को तलाशना मुश्किल होता है।
- खासकर रात के समय बर्थ को लेकर विवाद होने पर सुलझाने वाला कोई नहीं होता।
- चलती ट्रेन में यात्रियों को मदद नहीं मिल पाती।
- वेटिंग टिकट के कंफर्म होने का पता नहीं लग पाता।
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