झांसी। झमाझम बारिश से पानी के स्रोत लबालब हो गए हैं। लोगों को उम्मीद थी कि अच्छी बारिश हो जाने से जलापूर्ति की रफ्तार सुधर जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। कई मोहल्ले ऐसे हैं, जहां पर एक टाइम पर एक घंटा के लिए ही पानी की आपूर्ति हो रही है। जिन लोगों के घरों में मोटर नहीं है, वह पर्याप्त पानी नहीं भर पा रहे हैं और इधर- उधर लगे हैंडपंपों से पानी की जरूरत पूरी कर रहे हैं। एक टाइम पानी आने के कारण दस हजार लोग प्रभावित हैं।
पानी वाली धर्मशाला के आसपास का क्षेत्र हमेशा पानी से संपन्न रहा है। यहां के निवासियों को कभी भी पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ा। लेकिन, अबकी बार वह भी परेशान रहे। कारण, धर्मशाला के सुंदरीकरण के कारण उसे खाली कर दिया गया, जिससे आसपास लगे हैंडपंप और कुओं का पानी सूख गया। गर्मियों से ही नलों में एक टाइम पानी आ रहा है। अच्छी बारिश के बाद स्थानीय निवासियों को उम्मीद थी कि अब दोनों टाइम नलों से पानी आएगा तो पानी की किल्लत दूर हो जाएगी।
मोहल्ला नरसिंहराव टौरिया, झारखड़िया, चंद्रशेखर आजाद, गणेश बाजार, हींगन कटरा समेत आसपास के क्षेत्र में सुबह एक बार नलों में एक घंटे के लिए पानी आता है। शुरू में पानी फोर्स से आता है, लेकिन जैसे- जैसे अवैध मोटरें चलना शुरू होती हैं, नलों में पानी की रफ्तार धीमी हो जाती है। इन मोहल्लों में कुछ इलाके ऊंचाई पर बसे हैं, यहां पर बहुत कम पानी आता है। कभी- कभी तो पंद्रह से बीस मिनट के लिए ही पानी मिल पाता है।
ऐसे जवाबों से अक्सर होती है नोकझोंक
मोहल्लों में पानी नहीं आता है तो मोहल्लेवासी जल संस्थान के अधिकारी को फोन कर समस्या बताते हैं। इस पर उनका तर्क रहता है कि एक टाइम पानी दे तो रहे हैं। जब पलटकर जवाब दिया गया कि खाना दो टाइम क्यों खाते हो, तो इसको लेकर दोनों में विवाद होने लगा। मोहल्लेवालों का कहना है कि अवैध मोटरों से दिक्कत होती है, इन्हें बंद कराओ तो विभागीय लोगों का तर्क रहता है कि यदि इन्हें बंद कराएंगे तो बवाल होगा। यह आए दिन की स्थिति है।
पूर्व मंडलायुक्त गए तो लाइन भी भूल गए
तत्कालीन मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने पानी वाली धर्मशाला का निरीक्षण किया था। उन्होंने यहां पानी का अथाह स्र्रोत देखा तो निर्देश दिए थे कि इसे मेन लाइन से जोड़ दिया जाए, ताकि आसपास के लोगों को पानी की किल्लत न हो। उनके निर्देश देते ही काम शुरू हो गया और लाइन डाल दी गई, लेकिन इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया। इसका नतीजा यह निकला कि विभाग इस लाइन को भूल गया। तब से लेकर अब तक लाइन जुड़ नहीं पाई है।
पानी की विकट समस्या है। इस ओर विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। 70 साल हो गए, पहले कभी पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ा। इस बार तो हद ही हो गई। पानी आवश्यक सेवा के अंतर्गत आता है।
- महेश शर्मा
जिनके यहां मोटर नहीं है, वह पानी नहीं भर पा रहे हैं। मेरे यहां भी पंद्रह से बीस मिनट ही पानी आ रहा है, जबकि विभाग का दावा है कि एक घंटे पानी की सप्लाई हो रही है। इसकी जांच कराई जाए।
- अनिल दीक्षित
आसपास के पांच मोहल्लों में पानी की बहुत समस्या है। पहले दो बार पानी आता था, लेकिन छह महीने से एक बार ही आ रहा है। अवैध रूप से मोटरें चल जाने के कारण नलों का फोर्स कम हो जाता है।
- महेशचंद्र गुप्ता
गर्मियों में पानी की किल्लत थी, तो कम पानी में ही काम चला लेते थे। लेकिन अब तो पानी की कोई कमी नहीं है। इसके बाद भी परेशान होना पड़ रहा है। यह परेशानी रोजमर्रा की आदत बन गई है।
- विजय जैन, व्यापारी नेता
दावा किया जा रहा है कि झांसी स्मार्ट सिटी बन गई है। जब स्मार्ट सिटी में पानी का यह हाल है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि स्मार्ट सिटी नहीं होती तो क्या होता। कम से कम पानी तो ठीक से दे दिया जाए।
- विक्की लक्ष्यकार
क्षेत्र में यदि कहीं पर पानी की दिक्कत हो रही है या मोटरों से पानी खींचा जा रहा है तो अवर अभियंता को मौके पर भेजकर समाधान कराया जाएगा। फिलहाल पानी एक टाइम ही दे पाएंगे।
- आरएसएस बादलीवाल
अधिशासी अभियंता, जल संस्थान