एक महीने लड़ी कोरोना से जंग, 12 लाख हुए खर्च, हिस्से में मौत आई
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण ने शिक्षा विभाग के एक और कर्मचारी की जान ले ली। तकरीबन एक माह तक महामारी से जूझते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिपिक मनोज सक्सेना जिंदगी की जंग हार गए। इलाज पर बारह लाख रुपये खर्च करने के बाद भी उनके हिस्से में मौत आई। इससे पहले बेसिक शिक्षा विभाग के 26 शिक्षक और कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है। इससे विभाग में शोक का माहौल बना हुआ है।
कोरोना वायरस का संक्रमण और उसी बीच हुए पंचायत चुनाव बेसिक शिक्षा विभाग पर बेहद भारी साबित हुए हैं। इस महामारी की चपेट में आने से 26 शिक्षक व कर्मचारी जान गंवा चुके हैं। 27वीं मौत बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत लिपिक मनोज सक्सेना (51) की हुई है। मनोज की गिनती विभाग के मेहनती कर्मचारियों में होती थी। उनकी पंचायत चुनाव की मतगणना में ड्यूटी लगी थी। इसके बाद से इस महामारी की चपेट में आ गए थे। तबियत ज्यादा बिगड़ने पर आठ मई को उसे एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर उसे दूसरे नर्सिंग होम में भर्ती किया गया। अस्पताल बदलने के बाद भी उसकी हालत में कोई बदलाव नहीं आया था। इलाज के परिवार के लोगों ने पूरी ताकत झोंकी। साथ कर्मचारियों ने भी अपने सहकर्मी को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इलाज पर पानी की तरह पैसा बहाया गया। लगभग बारह लाख रुपये खर्च किए गए। बावजूद, मनोज के हिस्से में मौत आई। पांच जून को उन्होंने अंतिम सांस ली।
विदित हो कि इससे पहले सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा कार्यालय के लिपिक सुधीर कुमार श्रीवास्तव की मौत भी हो चुकी है। वे भी चुनाव ड्यूटी के बाद संक्रमित हो गए थे। लंबे इलाज के बाद उन्हें भी नहीं बचाया जा सका था।