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सर्दियों में बढ़े स्ट्रोक के मरीज, एक ही दिन में तीन को अटैक

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झांसी। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही स्ट्रोक की मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। हालात ये हैं कि सरकारी अस्पतालों में रोजाना तीन मरीज पहुंच रहे हैं। जबकि, सर्दी अभी चरम पर नहीं पहुंची है। ऐसे में डॉक्टर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
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सर्दियों में संक्रमण दर में वृद्धि, व्यायाम की कमी और हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के बढ़े हुए मामलों का कारण होते हैं। सर्दियों में हवा भी काफी हद तक प्रदूषित हो जाती है। इससे छाती, हृदय की स्थिति बिगड़ जाती है। वहीं, इस मौसम में खून गाढ़ा हो जाता है। इससे रक्त की पतली नलिकाएं संकरी हो जाती हैं और उनका दबाव बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। मौजूदा समय में सर्दियों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने से सुबह लोगों की सर्दी झेलनी पड़ रही है। इसी कारण स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
12 फीसदी मरीज 40 साल से कम
किसी भी उम्र में स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। चिंता की बात तो ये है कि आजकल 12 फीसदी स्ट्रोक के मरीज 40 साल के उम्र के होते हैं। जिन लोगों को हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें इसके होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं, गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन कर रहीं महिलाएं भी इसकी चपेट में जल्द आ सकती हैं।
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ऐसे पहचानें लक्षण
स्ट्रोक का सबसे सामान्य लक्षण होता है शरीर के किसी एक हिस्से में कमजोरी या लकवा जैसी स्थिति होना। स्ट्रोक आने पर मरीज का एक तरफ से हाथ और पैर भी नहीं हिला पाता। बोलने में दिक्कत, कम सुनाई देना और धुंधला दिखना भी स्ट्रोक के लक्षण हैं।
ये रखें ध्यान
स्ट्रोक आने पर अगर सही इलाज किया जाए तो इसके खतरे से बचा जा सकता है। स्ट्रोक आने पर रोगी को किसी पास के अस्पताल में जाना चाहिए। जहां 24 घंटे सीटी स्कैन, एमआरआई की सुविधा हो। सर्दियों में लोग कम पानी पीते हैं, जिस कारण खून गाढ़ा हो जाता है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि आप सर्दियों में अधिक मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पीएं।
स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। एक ही दिन में बृहस्पतिवार को स्ट्रोक के तीन मरीज जिला अस्पताल आए। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। स्ट्रोक आने पर मरीज का मुंह टेढ़ा होने लगता है। मरीज का एक तरफ से हाथ और पैर भी नहीं हिलता। बोलने में भी दिक्कत होती है। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत अस्पताल लेकर आएं।
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- डॉ. डीएस गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल।
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