झांसी। बर्खास्त शिक्षक प्रकरण में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी बैकफुट पर आ गए हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद अधिकारी शिक्षक की पुन: ज्वाइनिंग नहीं रोक सकते और अक्तूबर, नवंबर का वेतन जारी करने समेत कार्यभार ग्रहण करने का आदेश निकालना ही पड़ गया। शिक्षक ने इसे सत्य की जीत बताया है। साथ ही कहा कि यदि यह आदेश पहले हो जाता तो उसके पिता भी इस पल के साक्षी बन जाते।
बीयू में टीक्यूप-3 प्रोजेक्ट अंतर्गत कार्यरत रहे डॉ. राजकुमार सिंह को डीन इंजीनियरिंग प्रो. एसके कटियार ने बर्खास्त कर दिया था। इस मामले में डीन और शिक्षक दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे। बर्खास्तगी के बाद शिक्षक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां से शिक्षक की बर्खास्तगी के आदेश को रद कर दिया गया। हालांकि, आगे की ज्वाइनिंग का फैसला बीयू पर छोड़ दिया। चूंकि, बर्खास्तगी का फैसला रद्द कर दिया गया, इसलिए शिक्षक ने पुन: ज्वाइनिंग के संबंध में प्रार्थनापत्र दिया। शिक्षक बार-बार अपने पिता की तबीयत का हवाला देते हुए ज्वाइन कराने की गुहार लगाता रहा। इसी बीच शिक्षक के पिता का कुछ दिन पहले बरेली स्थित घर पर निधन हो गया। इसका जिम्मेदार भी शिक्षक ने इंजीनियरिंग विभाग के एक अधिकारी और एक शिक्षक को बताया। अब इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी इस मामले में पूरी तरह बैकफुट पर आ गए हैं। डीन इंजीनियरिंग की तरफ से निकाले गए पत्र में शिक्षक को कार्यभार ग्रहण करने के लिए कहा गया है। पत्र में लिखा है कि टीक्यूप-3 परियोजना की प्रशासकीय परिषद की 24वीं बैठक 19 और 23 नवंबर के फैसले के अनुपालन में आपकी उपस्थिति एक अक्तूबर से मानते हुए अक्तूबर, नवंबर का वेतन निर्गत करने का आदेश जारी किया जाता है। साथ ही आदेशित किया जाता है कि आप स्वयं उपस्थित होकर अपना कार्यभार ग्रहण करें। वहीं, शिक्षक का कहना है कि उसे पत्र प्राप्त हो गया है। शनिवार को वह ज्वाइन करेगा। ये सत्य की जीत है। बस अफसोस इस बात का है कि ये फैसला यदि पहले हुआ होता तो पिता भी इस पल के साक्षी बन पाते।
मजिस्ट्रेट जांच भी चल रही
बर्खास्त शिक्षक प्रकरण में मजिस्ट्रेट जांच भी चल रही है। इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। शिक्षक को भी अपना पक्ष रखना है। जल्द ही मजिस्ट्रेट जांच का परिणाम भी सामने आ सकता है।