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एक तिथि एक त्योहार पर एक राय जरूरी

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झांसी। पिछले कुछ वर्षों में महानगर में कई प्रमुख त्योहार दो दिन मनाए जाने लगे हैं। ऐसे में हमेशा श्रद्धालुओं में त्योहार की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार पंचांग भले ही अलग - अलग हों, लेकिन त्योहार की एक निश्चित तिथि को लेकर एक राय होना आवश्यक है। इस संबंध में काशी विद्वत परिषद और स्थानीय धर्माचार्यों को भी मंथन करना चाहिए। इसके साथ ही, त्योहारों में राजनीतिक एवं सामाजिक दखलंदाजी भी कतई न हो।
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सनातन धर्म में कई संप्रदाय हैं। नीमच, ऋषिकेश, बनारस, जबलपुर, राजस्थान सहित कई जगहों के पंचांग प्रचलित हैं। सूर्योदय के मिनटों में अंतर होने से तिथियां घट - बढ़ जाती हैं। त्योहारों की तिथि पर भेद न हो और एक तिथि - एक त्योहार हो। इस संबंध में बनारस विद्वत परिषद को पत्र लिखूंगा, वह समस्त धर्माचार्यों की बैठक कराए।
महंत विष्णु दत्त स्वामी
प्रत्येक त्योहार के स्वभाव अलग - अलग हैं। जन्माष्टमी, नवमी, दीपावली, दशहरा, एकादशी, शिवरात्रि परता तिथि में शुभ होते हैं। यह वह तिथि है, जो दिन में आती है। आवश्यकता है, कि बडे़ त्योहारों के समय में सभी धर्माचार्य एवं ज्योतिष विद्वान संयुक्त रूप से त्योहार की तिथि घोषित करें। डॉ. नाथूराम पांडेय, ज्योतिषविद्
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सभी पंचांगों में भेद नहीं है। सभी एक ही गणित से बनाये जाते हैं। कलेंडर अवश्य अलग - अलग ढंग से बनते हैं। ऐसे में यह भिन्नता आने लगी है। काशी विद्वत परिषद से अनुमोदित पंचांगों में वर्णित तिथियों से त्योहार मनाएं। सरकार का कलेंडर भी इससे अनुमोदित होता है। आचार्य हरीओम पाठक
सनातन धर्म में समस्त त्योहार ऐसे है, जो तिथि, योग एवं नक्षत्रों पर आधारित है। इनमें मकर संक्रांति, जन्माष्टमी, दीपावली आदि प्रमुख पर्व है। सभी बडे़ त्योहारों पर एक तारीख एक त्योहार को लेकर एक राय होनी चाहिए। ताकि श्रद्धालु असमंजस में न रहे। शिव केश दुबे, ज्योतिषविद।
बंगाली समाज के सभी त्योहार पश्चिम बंगाल की ज्योतिष पुस्तिका वेनी माधव शील से होते हैं। इसमें समस्त तिथियां रहती हैं। उत्तर भारत के पंचांगों से कोई विशेष जुड़ाव नहीं रहता है। क्योंकि दिल्ली और पश्चिम बंगाल के सूर्योदय समय में काफी अंतर रहता है। प्रियांशु डे सचिव कालीबाड़ी एसोसिएशन सीपरी
झांसी का महाराष्ट्र समाज सामान्यत: ग्वालियर का पंचांग मानता है। हालांकि झांसी में जो प्रचलित पंचांग है, वह भी मानते हैं। ग्वालियर एवं झांसी के सूर्योदय के समय में व्यापक अंतर नहीं रहता है। स्थानीय श्रद्धालुओं को झांसी की धर्म सभा के अनुसार त्योहार निश्चित तिथि पर मनाना चाहिए। गजानन खानवलकर पुरोहित महाराष्ट्र समाज
प्रत्येक त्यौहार के स्वभाव अलग - अलग है। कोई शाम को, तो कोई रात्रि केा और कोई दिन में मनता है। ऐसेम ें आवश्यकता है कि बडे़ त्यौहारों के समय सभी धर्माचार्य और ज्योतिष संयुक्त रूप से त्यौहार तिथि घोषित करे, ताकि श्रद्धालुओं के समक्ष असमंजस न हो। डॉ. नाथूराम पांडेय
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