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वन विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर दरोगा से ठगे एक करोड़

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झांसी। वन विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाजों ने दरोगा से एक करोड़ रुपये ठग लिए। सेवानिव़ृत्त हो जाने के बाद दरोगा को फर्जीवाड़े के बारे में पता चला। सेवानिवृत्त दरोगा ने कोर्ट की मदद से नवाबाद थाने में पांच जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
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थाना सीपरी बाजार के फौजी चौराहा, संगम विहार कालोनी निवासी सैय्यद वहीद अली करीब सात साल पहले जालौन में उपनिरीक्षक पद पर तैनात थेे। उन्होंने पुलिस को बताया उस दौरान आजमगढ़ निवासी ज्ञानेश्वर उपाध्याय (53) से उनका परिचय हुआ। ज्ञानेश्वर ने ऊंचे रसूख का हवाला देते हुए आजमगढ़ वन विभाग में वन दरोगा, वन रक्षक एवं लिपिक पद पर नियुक्ति दिलाने की बात कही। उसके झांसे में वाहिद आ गए। 9 अक्तूबर 2016 को ज्ञानेश्वर ने उनको झांसी में आला वन अधिकारी के बंगले में बुलाया। यहां बीस-बीस लाख रुपये में नौकरी दिलाने की बात तय हुई। दरोगा ने अपने तीन पुत्र एवं दो रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने के लिए अलग-अलग तिथियों में बैंक के माध्यम से कुल 99.20 लाख रुपये दिए। करीब एक लाख रुपये अलग से दिए। इसके बाद शातिर जालसाज ने सभी को नियुक्ति पत्र भी थमा दिया। जालसाज ने एक माह बाद वेतन मिलने की भी बात कही। एक महीने बाद वेतन के लिए जारी चेक बाउंस हो गया। उन्होंने ज्ञानेश्वर को फोन मिलाया लेकिन, उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। उसकी तलाश में वह आजमगढ़ पहुंचे। यहां भी जालसाज नहीं मिला। पुलिस ने भी शिकायत नहीं सुनी। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर नवाबाद पुलिस ने रविवार को मुख्य आरोपी ज्ञानेश्वर उपाध्याय समेत रमेश चंद्र झा, शेषनारायण झा, संजय सिंह एवं अनीस अंसारी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर ली। नवाबाद इंस्पेक्टर सुधाकर मिश्र के मुताबिक रिपोर्ट दर्ज करके मामले की छानबीन शुरू करा दी गई है।
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