झांसी। लोक निर्माण विभाग में वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। करीब एक करोड़ रुपये के टेंडर पूल मामले की अधीक्षण अभियंता जांच कर रहे थे लेकिन, इसी बीच निर्माण खंड-तीन के अधिशासी अभियंता ने कार्यदायी एजेंसियों को पूरा भुगतान कर दिया।
पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड तीन ने दिसंबर में एरच-ककरवई (25 किमी स्थित, लागत 23.30 लाख) एरच-बेंदा-रामनगर (03 किमी एवं 22 किमी स्थित, लागत 34.60 लाख) मार्ग स्थित रपटा मरम्मत एवं नागर संपर्क मार्ग (लागत 24 लाख) की मरम्मत कार्यों की निविदा निकली थी। शिकायत के मुताबिक एक्सईएन की शह पर सारे टेंडर मिलीभगत करके पूल कर लिए गए। सबसे अधिक खेल नागर संपर्क मार्ग को लेकर हुआ। इसमें दो एजेंसियों के सशर्त बैंक गारंटी लगाने से उनको बाहर करके निविदा निरस्त कर दी गई लेकिन, बाद में इसी सशर्त बैंक गारंटी के आधार पर निविदा स्वीकृत करके उन्हीं एजेंसियों को काम थमा दिया गया। शिकायत में बताया गया कि चहेतों के काम बांटने का रास्ता बनाने के लिए मनमाने तरीके से नियमों को तोड़ा-मरोड़ा गया।
कई बड़ी एजेंसियों को पीडब्ल्यूडी शेड्यूल के खिलाफ जाकर बाहर किया गया। सभी एजेंसियों ने टेंडर पूल हो जाने की शिकायत दर्ज कराई। मामले की शिकायत मुख्य अभियंता संजय तक पहुंची। उन्होंने अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार को जांच के निर्देश दिए लेकिन, आरोप है मामले की जांच शुरू होते ही निर्माण खंड-तीन के अधिशासी अभियंता बीएल सिंह ने एजेंसियों को भुगतान भी कर डाला। अब अधीक्षण अभियंता की ओर से सभी दस्तावेज मांगे जा रहे लेकिन, एक्सईएन दस्तावेज उपलब्ध कराने को राजी नहीं। सात अक्तूबर को अधीक्षण अभियंता ने दुबारा पत्र भेजकर सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा लेकिन, एक्सईएन की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
यह मामला संज्ञान में था। जांच के लिए अधीक्षण अभियंता को निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने पर ही इस बारे में अधिक कुछ कहा जा सकेगा
संजय, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी, झांसी वृत्त