कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दतिया की पीतांबरा पीठ के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा धाम के विश्व प्रसिद्ध रामराजा मंदिर परिसर को भी आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया है। पांच सौ वर्ष में यह पहला मौका है जब रामराजा सरकार के दर्शन पर भक्तों के लिए पाबंदी लगाई गई है। मंगलवार को दोपहर की आरती के बाद मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया।
इसके अलावा चतुर्भुज मंदिर में भी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। मंदिरों में पुजारियों द्वारा नित्य पूजा अर्चना जारी रहेगी।
निवाड़ी कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने पूरे नगर में इस संबंध में आम सूचना से संबंधितपर्चे लगवा दिए हैं। रामराजा सरकार की सुबह बालभोग आरती, दोपहर राजभोग आरती, शाम को संध्या आरती तथा रात में शयन आरती यथावत चलती रहेगी पर इसमें केवल पुजारी ही मौजूद रहेंगे, भक्त नहीं पहुंच सकेंगे। यहां होने वाले उत्सवों में भी भीड़ नहीं पहुंच सकेगी।
ओरछा के प्राचीन महलों में भी सैलानियों का प्रवेश बंद
नगर के राजा महल, जहांगीर महल, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर सहित सभी प्राचीन स्मारकों को स्टेट पुरातत्व विभाग के आदेश पर बंद कर दिया गया है । इस आशय की जानकारी एसडीएम वंदना राजपूत व तहसीलदार रोहित वर्मा ने नगरवासियों के साथ बैठक करने के बाद दी। लोगों के रामराजा मंदिर में राजभोग थाल की बुकिंग फोन पर की जाएगी। इसके अलावा मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं को बंटने वाला बाल भोग खिचड़ी, व्यापारी प्रसाद का वितरण भी बंद रहेगा । बताया कि 29 मार्च को फि र से बैठक के बाद स्थिति को देखते हुए श्री राम जन्मोत्सव पर मंदिर में दर्शनार्थियों के प्रवेश पर विचार किया जाएगा ।
देश का इकलौता मंदिर जहां रामजी को दिया जाता है गार्ड आफ ऑनर
ओरछा में रामराजा सरकार को सोलहवी सदी में यहां की महारानी कुंअर गणेश ने अयोध्या से लाकर ओरछा में राजा के रूप में विराजमान कराया था। यह देश का इकलौता मंदिर है जहां पर भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है। चार पहर की आरती में मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों द्वारा प्रतिदिन रामराजा सरकार को गार्ड आफ ऑनर दिया जाता है। यह परंपरा रामराजा सरकार के ओरछा में विराजमान होने से लेकर अब तक चली आ रही है। प्रदेश सरकार से पहले ओरछा राजवंश के सिपाहियों द्वारा रामराजा को सलामी दी जाती रही है। उत्सव व त्योहारों पर रामराजा को गार्ड की एक आठ की टुकड़ी द्वारा सलामी दी जाती है। भक्तों पर लगाई गई पाबंदी के बाद भी पुजारी के अलावा सुरक्षा व सलामी देने के लिए लगाए गए पुलिस के जवान मंदिर के अंदर ही रहेंगे।
रामजन्मोत्सव के कार्यक्रम को लेकर भी संशय
रामराजा मंदिर मेें भक्तों की आवाजाही पर रोक लगाने के बाद दो अप्रैल को होने वाले विशाल रामजन्म महोत्सव के आयोजन को लेकर भी संशय की स्थिति बरकरार है। मंदिर परिसर में भीड़ इकट्ठे न होने देने के निर्णय के बाद प्रशासन स्वयं भी यह बता पाने की स्थिति में नहीं है कि ओरछा का रामजन्मोत्सव समारोह होगा भी या नहीं। प्रशासन ने मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगाने का जो आदेश जारी किया है, इसमें 17 मार्च से लेकर अग्रिम आदेश तक लिखा है। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है तब ओरछा मंदिर परिसर में भीड़ इकट्ठा होने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसे में रामजन्मोत्सव भी प्रभावित हो सकता है।