झांसी। खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए अफसर पिछले कई माह से रणनीति तैयार कर रहे है। लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी रणनीति बेअसर साबित होती नजर आ रही है। सख्ती के कई दावों के बावजूद फसल की कटाई खत्म होते ही खेतों पर ही पराली जलाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही है। शुक्रवार को ही पराली जलाने के आरोप में पुलिस ने 12 से अधिक किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं। इस तरह झांसी में यह संख्या बढ़कर 36 के करीब हो गई है।
पराली जलाने पर रोकथाम के लिए एनजीटी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं। इसको देखते हुए पिछले कई माह से जिला प्रशासन रणनीति तैयार करने में जुटा था। किसानों को जागरूक करने के लिए लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक की ड्यूटी लगाई गई। पराली जलने पर संबंधित लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का भी अल्टीमेटम दिया गया। लेकिन, फसल कटने के बाद किसानों के बीच कोई जागरूकता अभियान नहीं चला। कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से भी कोई प्रयास नहीं किए गए। नतीजतन, पराली जलाए जाने की घटना में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। अब तक करीब 48 से अधिक किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके। शुक्रवार को बरुआसागर थाने में ओमप्रकाश, वीरेंद्र कुमार, रामकिशोर, परमानंद, प्रमोद, रामस्वरूप, सुंदर सिंह, कल्यान सिंह, रामप्रकाश, जमुना प्रसाद, शंकर, चिरगांव में महेश प्रसाद आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
सेटेलाइट से रिपोर्ट मिलने के बाद भी नहीं टूट रही नींद
पराली जलाने की निगरानी सेटेलाइट से किए जाने की बात कही जा रही लेकिन, इसके बावजूद भी जिन इलाकों में पराली जलाए जाने की घटनाएं सबसे अधिक सामने आईं वहां रोकथाम को लेकर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। इन्हीं इलाकों में तीन दिन पहले भी पराली जलाए जाने के मामले सामने आए थे लेकिन, अफसरों ने इसे कूड़ा जलने की वजह से पैदा हो रहा धुआं बताया था।