झांसी। कोरोना वायरस के बारे में जानना अब और आसान होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी में ही कोरोना के स्ट्रेन (रूप) का पता लगाने के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू करने के आदेश दे दिए हैं। बुंदेलखंड समेत आसपास के जिलों में कोरोना संक्रमित मिलने वाले मरीजों के सैंपलों की जीनोम सीक्वेंसिंग झांसी में ही हो सकेगी।
कम होते-होते कोरोना के केस फिर से बढ़ने लगे हैं। दुनिया के कई दूसरे देशों में डेल्टा प्लस से भी आगे का स्ट्रेन आ चुका है, जो ज्यादा संक्रामक माना जा रहा है। इस स्ट्रेन का नाम है ओमिक्रॉन। विशेषज्ञ भी आशंका जता रहे हैं कि ओमिक्रॉन कोरोना की तीसरी लहर ला सकता है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने एलर्ट मोड पर आते हुए झांसी समेत लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ जिले में जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू कराने का आदेश जारी कर दिया है। इसके जरिए कोरोना के रूप के बारे में जाना जा सकेगा। पता चल सकेगा कि कोरोना संक्रमित मरीजों में कहीं ओमिक्रॉन तो नहीं है। झांसी ही नहीं पूरे बुंदेलखंड से सैंपल जांच के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज भेजे जाएंगे। बताया गया कि जीनोम सीक्वेंसिंग में मरीज के शरीर से वायरस का सैंपल लिया जाता है और लैब में उसकी आनुवंशिक संरचना का पता लगाते हैं। इससे उसका जेनेटिक कोड निकल आता है।
म्यूटेशन को समझने के लिए है जरूरी
वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं। ताकि, उन्हें मारा न जा सके। ये सर्वाइवल की प्रक्रिया ही है, जिसमें जिंदा रहने की कोशिश में वायरस रूप बदल-बदल कर खुद को ज्यादा मजबूत बनाते हैं। ये ठीक वैसा ही है, जैसे हम इंसान भी खुद को बेहतर बनाने के लिए कई नई चीजें सीखते और आजमाते हैं। वायरस भी इसी फॉर्मूला पर काम करता है और अपने अंदर बदलाव लाता है। यही म्यूटेशन है।
इसी से मिलती है वायरस की जेनेटिक जानकारी
वायरस में बदलाव होने पर कई बार मौजूदा दवाएं या वैक्सीन काम नहीं करती। ऐसे में उनके फॉर्मूला में बदलाव लाना होता है। इसी दौरान काम आती है जीनोम सीक्वेंसिंग। असल में मानव शरीर जैसे डीएनए से मिलकर बनता है, वैसे ही वायरस भी या डीएनए या आरएनए से बनता है। कोरोना वायरस आरएनए से बना है। जीनोम सीक्वेंसिंग वो तकनीक है, जिससे इसी आरएनए की जेनेटिक जानकारी मिलती है। आसान भाषा में कहें तो वायरस कैसा है, कैसे हमला करता है और कैसे बढ़ता है, ये जानने में जीनोम सीक्वेंसिंग काम आता है।