अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई पैरामेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों ने नवाचार कर जो वेन मेकर कम फाइंडर डिवाइस विकसित की है, अब वह बाजार में आएगी। इसका इस्तेमाल अस्पताल से लेकर पैथोलॉजी लैब में होगा। इसके लिए कॉलेज एक निजी कंपनी को तकनीकी हस्तांतरण करेगा। इससे कॉलेज को दो लाख रुपये मिलेंगे।
पैरामेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियाें ने कम रोशनी होने या फिर नस न मिलने पर रक्त के नमूने लेने में आने वाली समस्या शिक्षकों से साझा की थी। इसके बाद ही वेन मेकर (नसें बनाने वाली तकनीक) बनाने का सुझाव आया। पैरामेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. अंशुल जैन के नेतृत्व में शिक्षकों और छात्रों की टीम ने जनवरी, 2025 में डिवाइस तैयार कर ली। पैरामेडिकल कॉलेज की टीम की ओर से विकसित की गई डिवाइस की कीमत 400 से 500 रुपये बीच रखी जाएगी, है, जो बाजार में उपलब्ध वेन फाइंडर से काफी सस्ती है। अभी बाजार में जो वेन फाइंडर उपलब्ध हैं, उनसे लाल रोशनी निकलती है। इनके इस्तेमाल के लिए लैब या वॉर्ड में रोशनी काफी कम करनी पड़ती है। इसके बाद भी धमनियां सिकुड़ी ही रहती हैं। ऐसे में नस मिलने के बाद भी रक्त का नमूना लेने अथवा आईवी कैन्युला डालने में परेशानी कम नहीं होती।
नव विकसित डिवाइस पेंसिल आकार की बैटरी पर काम करता है। निदेशक का कहना है कि डिवाइस में दो अलग-अलग रंग की खास तरह की एलईडी लगाई गई है। एक एलईडी के प्रकाश से जहां कम रोशनी में नस से रक्त का नमूना लेने में मदद मिलती है। वहीं, दूसरी एलईडी की रोशनी त्वचा पर पड़ते ही नस चमकने लगती है। अब इसका तकनीकी हस्तांतरण निजी कंपनी से किया जाएगा। इसके लिए संस्थान को दो लाख रुपये मिलेंगे। बाजार में विक्रय की जाने वाली हर डिवाइस पर झांसी पैरामेडिकल कॉलेज द्वारा विकसित भी लिखना होगा।
पेटेंट से लेकर लागत का खर्च कंपनी उठाएगी
झांसी। तकनीकी हस्तांतरण समझौते के तहत पेटेंट, डिवाइस का व्यावसायिक निर्माण, प्रचार-प्रसार का पूरा खर्च निजी कंपनी उठाएगी। डिवाइस का संयुक्त पेटेंट भी दाखिल होगा। इसमें पैरामेडिकल कॉलेज के छात्र शिवांगी, प्रियंका, हर्षित, अंकिता और शिक्षक छवि, दु्ष्यंत प्रकाश के नाम सह-विकासकर्ता के रूप में शामिल होंगे।