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जितनी खर्च होगी यूनिट उतना पैसा देगा नगर निगम

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झांसी। नगर निगम अब खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइट का बिल अनुमानित नहीं देगा, जितनी यूनिट खर्च होगी, उतना ही भुगतान करेगा। इसके लिए बिजली विभाग हर ट्रांसफार्मर के पास एक मीटर लगाएगा और समानांतर केबल डालकर स्ट्रीट लाइट में कनेक्शन दिए जाएंगे। इस काम को पूरा करने के लिए बिजली विभाग ने सात करोड़ का एस्टीमेट तैयार करके नगर निगम को सौंपा है। बजट मिलते ही काम शुरू होगा।
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महानगर में जलने वाली स्ट्रीट लाइटों के बिल का भुगतान नगर निगम करता है। अभी महानगर में स्ट्रीट लाइटों की संख्या के हिसाब से लगभग 1900 किलोवाट बिजली की खपत है। इसके बदले नगर निगम अनुमानित 85 लाख रुपये का भुगतान हर महीने बिजली विभाग को करता है। मगर, नगर निगम को लगता है कि वह ज्यादा बिल का भुगतान कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने बिजली विभाग से यूनिट के हिसाब से बिल का भुगतान लेने के लिए कहा है। ऐसा प्रदेश में सभी जगह हो रहा। इसके लिए विभाग हर ट्रांसफार्मर के पास एक अलग मीटर लगाएगा और एक ट्रांसफार्मर से एक समानांतर केबल हर स्ट्रीट लाइट तक पहुंचेगी। इसमें बिजली विभाग केबल डालने का काम करेगा और मीटर नगर निगम अपनी कंपनी से लगवाएगा जो स्ट्रीट लाइट लगाने और रखरखाव का काम कर रही है। इस कार्य को पूरा कराने के लिए बिजली विभाग ने सात करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार नगर निगम को सौंपा है। बिजली विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता गौरव कुमार ने बताया कि हमको केबल डालने का काम करना है, मीटर नगर निगम की कंपनी उपलब्ध कराएगी। एस्टीमेट सौंप दिया गया है।
एलईडी लगने के बाद आधा हुआ बिल
बिजली विभाग को स्ट्रीट लाइटों में जलने वाली बिजली के बदले पहले हर महीने 1.50 करोड़ से ज्यादा का राजस्व मिलता था, लेकिन नगर निगम ने अब स्ट्रीट लाइटों में एलईडी लगवा ली है। इससे खपत आधी हो गई है। इससे बिल भी आधा हो गया। हालांकि, नगर निगम अभी भी शासन से 1.50 करोड़ का ही भुगतान लेता है। इसमें आधा बिजली विभाग और आधा स्ट्रीट लाइट लगाने और रखरखाव करने वाली कंपनी को दिया जाता है।
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यह होगा फायदा
अभी स्ट्रीट लाइट खराब होने पर अगर वह कई दिन तक सुधर नहीं पाती है तो भी नगर निगम को पूरा भुगतान करना पड़ता है। इस व्यवस्था में ऐसा नहीं हो सकेगा। जितनी यूनिट खर्च होगी, उतना ही बिल देना पड़ेगा।
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