अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कठिया गेहूं की तर्ज पर अदरक को भी जीआई टैग दिलाने की कवायद शुरू की गई थी। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी तय हो गई है। कृषि अफसरों का कहना है कि इससे न सिर्फ अदरक का उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय बढ़ेगी। यहां करीब दस हजार किसान अदरक उत्पादन से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
बरुआसागर में पैदा होने वाले अदरक की दूर-दराज के इलाकों में काफी डिमांड है। कृषि अफसरों का कहना है कि अगर इस उत्पाद को जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) मिल जाएगा तब इसकी मांग में इजाफा हो सकेगा। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की प्रोसेसिंग आसान होने के साथ ही इसे बाहर भेजने का रास्ता भी खुल सकेगा। इस पूरी बेल्ट मेें सालाना करीब 75 हजार क्विंटल अदरक का उत्पादन होता है। सीधे दस हजार किसान इससे जुड़े हैं। इनके प्रोसेसिंग की संभावनाओं को देखते हुए अब जीआई टैग के लिए नाबार्ड ने कवायद शुरू की है। बता दें कि मार्च माह में बुंदेलखंड के लिए कठिया गेहूं का जीआई टैग दिया जा चुका। उपनिदेशक उद्यान विनय यादव का कहना है कि अदरक को जीआई टैग मिलने से किसानों को फायदा होगा।