झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार पकड़ने के साथ ही बड़े पैमाने पर मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई थी। सेवा प्रदाता एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारी रखे गए थे। लेकिन, महामारी की रफ्तार मंद पड़ते ही इन कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कई माह के वेतन का भी भुगतान नहीं किया गया। शनिवार को ऐसे कई कर्मचारियों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर अपने हक की आवाज उठाई।
कलक्ट्रेट पहुंचे कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना काल में सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से उनकी तैनाती 20 जुलाई 2020 को की गई थी। लगभग दो सौ कर्मचारियों को पहले एक माह के लिए रखा गया था, लेकिन बाद में अवधि बढ़ाई जाती रही। वे कोविड - 19 के एल-1 व एल-2 अस्पतालों में अपनी सेवाएं पूरी मुस्तैदी के साथ देते रहे। कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन, अब जब परिस्थितियां सामान्य हो चली हैं, तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। ऐसे में रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। उन्होंने सेवाओं को नियमित रखे जाने और बकाया वेतन का भुगतान कराने की मांग की। इस मौके पर पूनम सक्सेना, पीयूष दीप, बेबी कंचन, फहीम, रीता वर्मा, करुणा कुशवाहा, सविता, रचना कुशवाहा, मोनिका देवी, प्रीति दिनकर, सविता, वर्षा आदि मौजूद रहीं।
सात माह से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वेतन केवल एक महीने का ही मिला है। इसके लिए भी सड़क पर धरना देना पड़ा था और अब नौकरी छीनी जा रही है। बकाया वेतन दिया जाए व नौकरी सुरक्षित रखी जाए।
- फरीन खान
कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर संक्रमितों के इलाज में जुटे रहे। लेकिन, अब जब बीमारी का खतरा कम हो गया है तो हमारा रोजगार छीना जा रहा है। हमारी सेवाओं को नियमित रखा जाना चाहिए।
- कंचन
विषम परिस्थितियों में हम सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। बगैर वेतन के लगातार अपनी सेवाएं देते रहे हैं। इसका प्रतिफल हमें बेरोजगार बनाकर दिया जाएगा। हमारी नौकरी को बरकरार रखा जाना चाहिए।
- अंशिका यादव
जब कोरोना संक्रमितों का उनके अपनों ने भी साथ छोड़ दिया था, तब हम उनके इर्दगिर्द रहकर इलाज में जुटे थे। एक ओर तो हमें कोरोना वारियर कहा जा रहा है, तो दूसरी और बेरोजगार किया जा रहा है।
- ऋतु प्रजापति