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व्यापारियों को अगस्त तक नहीं मिलेंगे वाणिज्य कर के नोटिस

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कोरोना महामारी के बढ़ते प्रभाव के कारण वाणिज्य कर कार्यालय में व्यापारियों के आने पर रोक लगा दी ग
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झांसी। कोरोना महामारी के बढ़ते प्रभाव के कारण वाणिज्य कर विभाग ने व्यापारियों के कार्यालय आने पर रोक लगा दी है। व्यापारियों को 31 अगस्त तक किसी भी प्रकार का नोटिस न भेजने का निर्णय लिया है। वैट के लंबित पड़े टाइम वार्ड (कालातीत) मामलों की सुनवाई की तिथि भी 31 मार्च से बढ़ाकर 31 अक्तूबर कर दी गई है।
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वाणिज्य कर विभाग व्यापारियों से हर महीने की 24 तारीख तक एक माह पहले का टैक्स जमा करवाता है। इसके बाद अगर विभाग संतुष्ट नहीं है तो वह व्यापारियों कोे रिटर्न की स्क्रूटनी, रिटर्न फाइल न करने, कम टैक्स जमा कर आईटीसी का लाभ ज्यादा लेने जैसे मामलों से जुड़े व्यापारियों को चिह्नित कर उनको नोटिस जारी करता है। पिछले दिनों एक टैक्स अधिवक्ता और उनके सीए पुत्र के कोरोना संक्रमित निकलने के बाद कार्यालय में आने- जाने वालों पर रोक लगा दी गई है। अधिवक्ताओं ने भी 31 अगस्त तक कार्यालय न आने का निर्णय लिया है। इस कारण विभाग ने 31 अगस्त तक व्यापारियों को किसी भी प्रकार का नोटिस न भेजने का निर्णय लिया है। कार्यालय में भी केवल अधिकारी व कर्मचारियों को प्रवेश दिया जा रहा है। जिनको नोटिस मिल भी गया है तो उनकी सुनवाई भी 31 अगस्त के बाद होगी।
- कोरोना महामारी के चलते वैसे तो 31 अगस्त तक व्यापारियों को नोटिस न भेजने का निर्णय लिया गया है, ताकि उनको कार्यालय न आना पड़े। अगर हालातों में सुधार होता है तो तिथि में बदलाव हो सकता है।
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प्रदीप कुमार सिंह, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन।
धीरे- धीरे बढ़ने लगा राजस्व
कोरोना महामारी के बीच वाणिज्य कर विभाग का राजस्व बढ़ना शुरू हो गया है। मई में जहां 120 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 18 करोड़ राजस्व मिला था, वहीं जून में 97 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 52 करोड़ प्राप्त हो गया। मई में कारखाने व बड़े प्रतिष्ठान खुलने से राजस्व बढ़ गया। इसमें डायमंड सीमेंट, जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर, नटराज ऑटोमोबाइल्स का अहम सहयोग है।
यह भी जानिए
वाणिज्य कर झांसी जोन के अंतर्गत बुंदेलखंड के सातों जिले आते हैं। इनमें झांसी के अलावा जालौन, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट शामिल हैं। झांसी जोन में 34500 जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी हैं, जिसमें 23000 के करीब को हर महीने रिटर्न जमा करना पड़ता है। जबकि, बाकी व्यापारी तीन महीने में रिटर्न दाखिल करते हैं। 23000 में 99 फीसदी से अधिक व्यापारी हर महीने रिटर्न जमा कर रहे हैं।
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