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जातिवादी नहीं, ईमानदार विधायक चुनेंगे

Mon, 06 Feb 2017 01:16 AM IST
Jhansi
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जातिवादी नहीं, ईमानदार विधायक चुनेंगे - फोटो : amar ujala
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झांसी। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रविवार को ‘अमर उजाला संवाद’ का आयोजन किया गया, जिसमें अधिवक्ताओं ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने देश व प्रदेश के विकास के लिए नीतिगत बदलाव की जरूरत बताई, तो वहीं स्थानीय समस्याओं को भी उठाया। अधिवक्ताओं ने एक सुर में शिक्षित, ईमानदार व जाति-धर्म से ऊपर उठकर काम करने वाले जनप्रतिनिधियों को चुने जाने की वकालत की। 
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ग्वालियर रोड औैद्योगिक क्षेत्र स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायपालिका को स्तंभ माना जाता है। इसके बावजूद अधिवक्ता वर्ग अनदेखी का शिकार है। अधिवक्ताओं के वर्तमान व भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार के पास कोई प्रभावी योजना नहीं है। इस दौरान वकीलों ने शिक्षक, स्नातकों की भांति विधान परिषद में अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व देने की भी बात की। साथ ही स्थानीय समस्याओं को भी उठाया। खासतौर पर शहर की सफाई, पार्किंग, अतिक्रमण, ऑटो की बढ़ती संख्या जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। अधिवक्ताओं ने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में उनका वोट उसे जाएगा, जो समाज के हर वर्ग को साथ में लेकर चलने की क्षमता रखता होगा। इसके अलावा जनप्रतिनिधि का शिक्षित और ईमानदार होना बेहद जरूरी है। 

वकीलों के हित में बने नीति 
केंद्र व राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों का ख्याल तो रखती हैं, परंतु अधिवक्ताओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए किसी भी सरकार के पास कोई पालिसी नहीं है। जबकि, अधिवक्ता लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने में अपनी भूमिका का लगातार निर्वहन करते आ रहे हैं। सरकार को सरकारी कर्मियों की भांति अधिवक्ताओं के हित में भी राष्ट्रीय स्तर पर पालिसी बनानी चाहिए। 
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- रितेश अग्रवाल, एडवोकेट 

जनप्रतिनिधि में हो सेवाभाव 
भ्रष्टाचार की शुरुआत राजनीति से होती है। नेता महंगा चुनाव लड़ते हैं और जीतने के बाद पहला काम खर्च की हुई रकम की वसूली होता है। यहीं से शुरू होता है भ्रष्टाचार। जनता का हित परे रख दिया जाता है और अफसरों से नेताओं जुगलबंदी हो जाती है। यह स्थिति देश के लिए खतरनाक है। जबकि, जनप्रतिनिधि में सेवाभाव होना जरूरी है, जिससे कि वह अपने अधिकारों का उपयोग जनसेवा में करे। 
- जितेंद्र कुमार खरे, उपाध्यक्ष - टैक्स अधिवक्ता संघ 

खलती है रिंग रोड की कमी 
झांसी बुंदेलखंड का बड़ा कारोबारी केंद्र है और मंडल मुख्यालय भी है, जिससे यहां वाहनों का भारी दबाव बना रहता है। बावजूद, आवश्यकतानुसार यातायात के प्रबंध नहीं हैं। खासतौर पर यहां रिंग रोड की कमी खलती है। इसके लिए ललितपुर और मऊरानीपुर रोड का जोड़ा जाना बाकी है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए, लेकिन पब्लिक से जुड़ी इस सुविधा की सभी अनदेखी कर रहे हैं।
- रामकुमार यादव, सचिव - तहसील अधिवक्ता संघ     

 शैक्षिक योग्यता निर्धारित हो 
शैक्षिक योग्यता कार्य की गुणवत्ता पर असर डालती है। यही वजह है कि चपरासी तक की शैक्षिक योग्यता निर्धारित है, लेकिन यह देश के लोकतंत्र का दुर्भाग्य है कि विधायक, सांसद, मंत्रियों की शैक्षिक योग्यता तय ही नहीं है। लेकिन, यह काम जनता कर सकती है। जनता केवल उसे ही वोट दे जो उच्च शिक्षित हो। साथ ही उसमें काम करने का जज्बा भी हो।
- लक्ष्मण प्रसाद शर्मा, अध्यक्ष - तहसील अधिवक्ता संघ  

अधिवक्ताओं को मिले प्रतिनिधित्व 
शिक्षकों से अधिक संख्या अधिवक्ताओं की है। अधिवक्ता समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय देने की लोकतंत्र की परिकल्पना को साकार करने में जुटे हुए हैं। बावजूद, अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। शिक्षकों की भांति अधिवक्ताओं को भी विधान परिषद में कोटा होना चाहिए। इसके अलावा अपराधियों से सांठगांठ रखने वाले नेताओं का इस चुनाव में बहिष्कार होना चाहिए। 
- रामप्रकाश मिश्रा, अध्यक्ष - डिवीजनल बार एसोसिएशन 

चुनाव में काले धन का न हो इस्तेमाल 
चुनाव में काले धन का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इससे चुनाव महंगे हो जाते हैं। योग्यता रखने के बाद भी साधारण व्यक्ति चुनाव लड़ने की सोच भी नहीं सकता है। इससे भ्रष्टाचार भी पनपता है। चुनाव में काले धन का इस्तेमाल न हो और तय सीमा में ही प्रत्याशी खर्च करें, इसके कागजी नहीं, बल्कि धरातल पर कड़े इंतजाम किए जाने चाहिए। 
- जेपी गुप्ता, अधिवक्ता 

धर्म-जाति से ऊपर उठकर हो चुनाव 
चुनाव में जनता को धर्म-जाति के नाम पर बरगलाने की कोशिश की जाती है। जनता भी नेताओं की बातों में आकर योग्य उम्मीदवार को दरकिनार कर धर्म - जाति के आधार पर वोट दे देती है। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह स्थिति ठीक नहीं है। इस पर अंकुश के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं, परंतु यह पर्याप्त नहीं है। जनता को ऐसे नेताओं चुनना ही नहीं चाहिए। 
- राजेश गुप्ता, एडवोकेट 
 
 मजबूत प्रत्याशी की दरकार 
तमाम विधायक प्रदेश में उनकी सरकार न होने का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारियों से बच जाते हैं, ऐसे नेताओं से जनता को बचना चाहिए। लोकतंत्र ने विधायकों को ढेरों अधिकार दिए हैं। इन अधिकारों का उपयोग करने की काबिलियत रखने वाले को ही वोट दिया जाना चाहिए। किसी भी क्षेत्र का विकास तभी हो सकता है, जब वहां का जनप्रतिनिधि मजबूत होगा। भले ही सरकार कोई भी हो। 
- विजय खन्ना, अध्यक्ष - आयकर अधिवक्ता संघ 

 सरकारी धन का हो सदुपयोग 
विकास के नाम पर सरकार पैसा तो बहुत खर्च करती है, परंतु इसका सदुपयोग नहीं होता है। बल्कि, अपव्यय होता है। पैसे के बंदरबांट के लिए सही सलामत सीसी सड़क को खोदकर एपेक्स बिछा दिए जाते हैं। इसे विकास बताया जाता है। यह स्थिति ठीक नहीं है। विधायक उसी को चुना जाना चाहिए, जो जनता के हित में काम करे और अपनी जिम्मेदारियों को समझे। 
- रामेश्वर राय, अध्यक्ष - सेल टैक्स अधिवक्ता संघ 

नियमों का पालन करने वाला हो प्रतिनिधि 
जनप्रतिनिधि ऐसा हो, जो शिक्षित और उसका कोई आपराधिक इतिहास न रहा हो। वह जनता की समस्याओं को सुने और उनका समाधान कराए। नियमों का पालन करने वाला है। इस विधानसभा चुनाव में दलगत और जातिगत परे रखकर उक्त खूबियों वाले नेता को ही वोट दिया जाए। इसके अलावा सरकारी कार्यों में पारदर्शिता के लिए व्यापक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। 
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- प्रणय श्रीवास्तव, सचिव - जिला अधिवक्ता संघ 

यह मुद्दे भी उठाए गए 
- शहर की ट्रैफिक व्यवस्था हो दुरुस्त 
- ऑटो की संख्या पर हो नियंत्रण 
- दुरुस्त हो सफाई व्यवस्था 
- नाले-नालियों की सफाई के हों पुख्ता इंतजाम 
- बेरोजगारी की समस्या का हो स्थायी समाधान 
- फोन न उठाने वाले पब्लिक से जुड़े अधिकारियों पर हो कार्रवाई 
- जगह-जगह हो पार्किंग की व्यवस्था, 
- शिक्षा के व्यवसायीकरण पर लगे रोक 
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