झांसी। निदेशालय लखनऊ द्वारा परिषदीय स्कूलों को दी जाने वाली नई पुस्तकों के लिए कोई निर्देश न आने से विद्यार्थियों को पुरानी किताबों से ही काम चलाना पड़ेगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नई पुस्तकों के लिए अभी दो माह और इंतजार करना पड़ेगा।
प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में लगभग एक लाख 65 हजार बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें नए शैक्षिक सत्र में ढाई माह बीतने के बाद भी नई पुस्तकें पढ़ने को नहीं मिली हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पुरानी एवं फटी पुस्तकों से ही काम चलाना पड़ रहा है। वहीं, शिक्षकों ने भी विभागीय निर्देश पर आगे की कक्षाओं में पहुंच चुके विद्यार्थियों से पुरानी पुस्तकें लेकर नए विद्यार्थियों को सौंप दी हैं।
सूत्रों के मुताबिक कई पुस्तकें जीर्णशीर्ण हालत में हैं। कई के पन्ने भी गायब हैं। ऐसे में इनसे पढ़ना मुमकिन नहीं है। वहीं, कुछ विद्यार्थियों को पुरानी पुस्तकें भी नहीं मिल पा रही हैं।
इस संदर्भ में बीएसए जय सिंह ने बताया कि नई पुस्तकें आने तक शिक्षक पुरानी पुस्तकों से ही पठन-पाठन कराएंगे। उन्होंने जुलाई तक नई पुस्तकों के आवंटन की संभावना जताई है।