विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं, मरीजों को करना पड़ रहा रेफर
सीरीज क्रमांक - 7
झांसी। महानगर में सुपर स्पेशिलिस्ट चिकित्सकों की कमी मरीजों के इलाज में भारी पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में कई विभाग में सुपर स्पेशिलिस्ट चिकित्सक नहीं हैं। कुछ मशीनें भी खराब पड़ी हुई हैं। इसलिए अन्य मरीजों की तरह आयुष्मान रोगियों को भी इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। योजना से संबद्ध कई निजी अस्पतालों की भी यही स्थिति है।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में स्पेशिलिस्ट डॉक्टर न होने की वजह से आयुष्मान रोगियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाल रोग, आंको सर्जन न होने से मरीजों को दूसरे शहर रेफर करना पड़ रहा है। कुछ मशीनें भी खराब होने के कारण मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। जिला अस्पताल में भी सुपर स्पेशिलिस्ट डॉक्टरों के पांचों पद खाली हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने एक साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी। बुंदेलखंड का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में स्पेशिलिस्ट चिकित्सक न होने की वजह से यह योजना सभी मरीजों के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में एक भी पीडिया सर्जन नहीं है। इस वजह से बच्चों की जटिल सर्जरी जैसे ट्यूमर, सीडीएच हार्निया आदि नहीं हो पाती है। वहीं, आंको सर्जन न होने के कारण भी कैंसर रोगियों की सर्जरी नहीं हो पा रही है। कैंसर रोग विभाग में लंबे समय से कोबाल्ट मशीन खराब पड़ी हुई है। इस कारण कैंसर के मरीजों की सिकाई नहीं हो पा रही है।
मेडिकल कॉलेज में नेत्र प्रत्यारोपण की भी सुविधा नहीं है। जबकि, कॉलेज की तरफ से नेत्र बैंक की स्थापना के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। शासन को कई बार पत्राचार भी हुआ, लेकिन अब यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में जा चुका है। नेत्र प्रत्यारोपण के लिए मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करना पड़ रहा है। आयुष्मान योजना के पात्र दंत रोगियों को सामान्य इलाज ही नसीब हो पा रहा है। मेडिकल कॉलेज में दंत रोग विभाग होने के बावजूद यह सिर्फ रूट केनाल और दांत साफ करने तक ही सीमित है। यहां पर नया दांत लगाने की सुविधा नहीं है। इसके अलावा अस्पताल में एंडोस्कोपी की भी सुविधा नहीं है।
वहीं, जिला अस्पताल में भी सुपर स्पेशिलिस्ट में यूरो सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, न्यूरो सर्जन, नेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट पद सृजित हैं। यह सब खाली चल रहे हैं। इसलिए यहां आने वाले मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।
अमर उजाला का अभियान
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को एक साल पूरे हो चुके हैं। इतना लंबा समय गुजरने के बाद भी सरकार की नि:शुल्क इलाज देने की मंशा अब तक अधूरी है। इस योजना के अंतर्गत जनपद की स्थिति और लाभार्थियों की समस्याओं को लेकर अमर उजाला अभियान चला रहा है। अभियान के तहत लगातार सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर योजना की हकीकत बयां की जा रही है।
आप भी दे सकते सुझाव
योजना के संबंध में कोई भी सुझाव या जानकारी देने के लिए आप हमारे मोबाइल नंबर 7617566165 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। इसके अलावा jhs-cityreporter@jhs.amarujala.com पर ई-मेल भी कर सकते हैं।
योजना के बारे में जानें
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को की गई थी। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को लाभार्थी बनाया गया। योजना के पैनल में शामिल सरकारी और निजी अस्पतालों में लाभार्थी इलाज करा सकते हैं। योजना के तहत लाभार्थी को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है।