झांसी। बिजली थाना खुलने के बाद से पिछले पांच महीने में एक हजार से अधिक चोरी की रिपोर्ट दर्ज हो चुकीं हैं। मगर, इनमें से 125 ने ही अभी तक जुर्माना जमा करके अपने को मुक्त कराया है। जबकि, बाकी भारी भरकम जुर्माने से परेशान हैं। अधिकांश की स्थिति जुर्माना भरने की नहीं है। इसलिए वे जेल जाने तक को तैयार हैं। हालांकि, थाना खुलने के बाद से लोगों को दूसरे थानों की पुलिस ने परेशान करना बंद कर दिया है।
विगत 19 सितंबर 2019 को सीपरी बाजार खालसा सबस्टेशन के बगल में खाली पड़े विभाग के भवन में विद्युत चोरी निरोधक पुलिस थाना दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का कार्यालय खोल दिया गया था। अभी तक बिजली अधिकारी और विजिलेंस द्वारा पूरे जनपद में की गई चेकिंग के बाद 1059 एफआईआर दर्ज कराईं जा चुकीं हैं। मगर, बढ़ी रिपोर्ट पुलिस के लिए परेशानी बनती जा रहीं हैं।
दरअसल, बिजली विभाग चोरी पकड़े जाने के मामलों में 30 से 50 हजार रुपये तक जुर्माना तय कर रही है। अधिकांश की हैसियत इतनी नहीं है कि वह इतना जुर्माना जमा कर सकें। इसलिए जुर्माना जमा न करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। दूसरा, कई लोग न्यायालय जाने की भी तैयारी कर रहे हैं।
पिछले पांच माह में थाने में 1059 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें 125 लोग शमन शुल्क जमा करा चुके हैं, जिनका मामला खत्म कर दिया गया है। बाकी की विवेचना चल रही है। जुर्माना जमा न करने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।
गनेश कुमार सिंह, थाना प्रभारी।
ज्यादातर ऐसे आते हैं मामले
- बिना कनेक्शन घर मेें कटिया डालकर बिजली चोरी
- बकाये पर कनेक्शन कटने के बाद फिर जोड़ लेना
- मीटर के पहले कट लगाकर।
- चोरी की बिजली से सिंचाई की मोटर चलाना।
- घरेलू बिजली कनेक्शन व्यावसायिक इस्तेमाल।
ये है कानून
- बिजली चोरी करते पाए जाने पर अगर अब तय शमन शुल्क जमा नहीं करते हैं तो तीन माह से सात साल तक ही सजा हो सकती है।
दो- दो करोड़ रुपये बढ़ाया लक्ष्य
अभी शहर के तीनों वितरण खंडों का 12- 12 करोड़ लक्ष्य है। मगर, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने इस लक्ष्य को दो- दो करोड़ रुपये और बढ़ा दिया है। साथ ही, विजिलेंस को एक महीने में 200 किलोवाट तक चोरी पकड़ने का लक्ष्य दिया गया है।