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प्राइवेट तो छोड़िए सरकारी डॉक्टर भी नहीं लिख रहे जेनरिक दवाएं

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doctor not writen jenric medicine
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झांसी। प्राइवेट तो छोड़िए सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों भी धड़ल्ले से मरीजों को बाहर की ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को औसतन दो लाख से ज्यादा की ब्रांडेड दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। जबकि, अस्पताल परिसर में मुख्य गेट के ठीक बगल में खुले जन औषधि केंद्र पर सन्नाटा पसरा रहता है।
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शासन को स्पष्ट आदेश है कि मरीजों को दवाओं के ब्रांड का नाम न लिखकर सॉल्ट का नाम लिखा जाए। जिला अस्पताल में ही शासनादेश की अवहेलना की जा रही हैं। अमर उजाला ने शुक्रवार को अस्पताल पहुंचकर मरीजों से बात की तो इस बात का खुलासा हुआ। जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग डेढ़ हजार लोग ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। जबकि, 35-40 लोग वार्ड में भर्ती होते हैं। अस्पताल में हर मरीज को औसतन सौ रुपये की दवा तो बाहर से खरीदनी पड़ती है। ऐसे में मरीज दो लाख से अधिक की ब्रांडेड दवाएं बाहर से खरीदने को मजबूर हैं। जबकि, जिला अस्पताल में खुले जन औषधि केंद्र पर सन्नाटा पसरा रहता है। वहीं, अस्पताल के बाहर खुले मेडिकल स्टोरों पर मरीजों की लाइनें लगी रहती हैं।
अस्पताल के डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि मरीजों को बाहर की दवा न लिखी जाएं। जिन भी दवाओं की कमी हो मुझे बताएं। कई दवाओं की मांग शासन से की जा चुकी है। वहीं, अस्पताल में जन औषधि केंद्र खुला है, ऐसे में दवाओं के सॉल्ट का नाम ही लिखें। यदि कोई डॉक्टर बाहर की दवा लिखता है तो मरीज सीधे आकर मुझसे शिकायत करे। कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. रजनी जसौरिया, सीएमएस, जिला अस्पताल।
मरीजों ने बयां किया दर्द
पेट में दर्द होने पर तीन दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती हुई हूं। डॉक्टर बाहर के मेडिकल स्टोर के इंजेक्शन लिख रहे हैं। रोज 200 रुपये की ब्रांडेड दवाएं खरीद रही हूं। - फरजाना, छनियापुरा।
दो दिन पहले ही जिला अस्पताल में भर्ती हुई हूं। कमजोरी व बीपी की समस्या है। अब तक 350 रुपये की दवा बाहर से खरीद चुकी हूं। डॉक्टर जेनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। - कामोदनी, राजगढ़।
कुछ दवाएं तो जिला अस्पताल में ही मिल जाती हैं लेकिन ज्यादातर डॉक्टर बाहर की दवाएं ही लिख रहे हैं। जेनरिक नहीं लिखी जाती। 400 रुपये की दवा बाहर से खरीद चुकी हूं। - सोनल, सीपरी बाजार।
ह्रदय में दर्द होने पर तीन दिन से जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती हूं। दर्द भी कम नहीं हो रहा। डॉक्टर सही से देखते भी नहीं हैं। बस बाहर की महंगी-महंगी दवाएं लिखे जा रहे हैं। - दीपमाला, खुशीपुरा।
सांस की समस्या होने पर जिला अस्पताल में भर्ती हुई हूं। यहां सैकड़ों रुपये की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है। डॉक्टर बाहर का सीरप और दवाएं लिख रहे हैं। - सावित्री देवी, उनाव गेट अंदर।
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