झांसी।
लेखपाल के खिलाफ लिखाया गया अपहरण का मामला झूठा पाया गया है। संबंधित
व्यक्ति ने लेन- देन के विवाद के चलते लेखपाल को फंसाने के लिए यह साजिश
रची थी। पुलिस ने संबंधित व्यक्ति को बरामद कर उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई
शुरू कर दी है।
विगत आठ नवंबर को कोतवाली में दिए प्रार्थना पत्र में
मास्टर कालोनी बाहर बड़ागांव गेट निवासी साबरा ने बताया था कि सात नवंबर को
प्रापर्टी डीलर उसके पति बरकत अली 70 हजार रुपये लेकर तहसील जाने की बात
कहकर निकले थे। उनका कोई पता नहीं लग रहा है, मोबाइल भी स्विच आफ है।
बारह
नवंबर को एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे को दिए प्रार्थना पत्र में परिजनों ने
बताया कि विवाद के चलते लेखपाल अशोक दुबे ने बरकत का अपहरण कर लिया। एसएसपी
के आदेश पर लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। एसएसपी ने मामले
के अनावरण के लिए नवाबाद थाना प्रभारी रामभजन सिंह व स्वॉट टीम प्रभारी
विक्रम सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी। पुलिस ने लेखपाल व दूसरे संदिग्ध
व्यक्ति से अलग- अलग पूछताछ की तो लेन- देन का मामला प्रकाश में आया।
इधर,
पुलिस का दबाव बढ़ता देख नागपुर गए बरकत ने परिजनों से स्थितियों की
जानकारी ली। चूंकि बरकत के परिवार के सदस्यों के मोबाइल सर्विलांस पर लगे
थे, जिससे पुलिस को पता लग गया कि यह अपहरण न होकर सिर्फ नाटक है।
शुक्रवार को बरकत छुपकर झांसी आ रहा था, पुलिस ने उसे बबीना रेलवे स्टेशन
से पकड़ लिया।
एसएसपी के अनुसार बरकत अली का लेखपाल अशोक दुबे से ग्यारह
लाख रुपये का लेन- देन चल रहा है। बरकत ने मानसिक रूप से प्रताड़ित होकर
लेखपाल को अपहरण के मामले में जेल भिजवाने की साजिश रची थी। वह खुद नागपुर
स्थित हजरत शाह की दरगाह चला गया था। एसएसपी ने अनावरण करने वाली टीम को
पांच हजार रुपये पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है।