नगर निगम ने रजिस्ट्रेशन कराने के लिए ऑटो वालों को तारीख पर तारीख दीं, लेकिन उन्होंने इसे भी हल्के में लिया। अब नगर आयुक्त के तेवर तल्ख हो गए हैं। ऑटो चालकों पर कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। शहर में आठ हजार ऑटो चलते हैं, इनमें से महज 11 सौ ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है।
ऑटो चालकों को स्टैंड की सुविधा देने के लिए नगर निगम ने सभी का रजिस्ट्रेशन कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए अक्तूबर माह में प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन, निर्धारित तिथि 15 नवंबर तक सिर्फ 1,100 ऑटो के रजिस्ट्रेशन ही हो सके हैं। जबकि, शहर मेें करीब आठ हजार ऑटो संचालित हो रहे हैं। दो बार तिथि बढ़ाने के बाद भी ऑटो संचालकों द्वारा इसमें रुचि नहीं लेने के बाद भी अब तक बहुत कम रजिस्ट्रेशन होने के बाद नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाया है। नगर आयुक्त ने एसएसपी को पत्र लिखकर कहा है कि टेंपो, टैक्सी, आपे, मैजिक, सात सीटर बस, मिनी बस आदि व्यावसायिक वाहनों को नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाना म्यूनिसिलैलिटीज एक्ट 1916 की धारा 299 (1) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
अगस्त माह में यूनियन के अध्यक्ष मंसूर अहमद मंसूरी और नगर निगम प्रशासन के बीच हुई वार्ता के बाद सभी ऑटो का लाइसेंस बनवाने के लिए एक माह का समय दिया गया, लेकिन ऑटो संचालकों ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने कहा कि बिना व्यावसायिक लाइसेंस के संचालित वाहनों को सघन चेकिंग अभियान चलाकर वाहनों को थाने में बंद कराया जाए। इन वाहनों को तभी छोड़ा जाए, जब वह नगर निगम में जाकर ऑटो का व्यावसायिक लाइसेंस न बनवा लें।
इंसेट
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ये है वार्षिक लाइसेंस फीस (रुपये में)
ऑटो रिक्शा (दो सीटर) 360
आटो रिक्शा (सात सीटर) 720
आटो रिक्शा (चार सीटर) 500
मिनी बस 1500
बस 2500
तांगा 50
रिक्शा 75
हाथ ठेला 25
भैंसा गाड़ी/ बैलगाड़ी 25
ट्राली 150
इस फीस के साथ नगर निगम विलंब शुल्क भी वसूलेगा, जिसे नगर आयुक्त तय करेंगे।