झांसी। मेडिकल कॉलेज की एसएनसीयू में 15 नवंबर 2024 की रात लगी आग में नवजातों की हुई मौत की घटना से जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया है। शायद इसी वजह से डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीआईईसी) में कालातीत फायर स्टिंग्युशर (आग बुझाने के उपकरण) लगे हैं।
मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन एसएनसीयू की प्रथम मंजिल पर डीआईईसी दो साल पहले चालू हुआ है। इससे बमुश्किल 10 कदम की दूरी पर जलकर नष्ट हुआ एसएनसीयू है। हैरानी तो यह है कि आग की गंभीर घटना को जिम्मेदार अफसरों ने भुला दिया है। यही वजह है कि डीआईईसी में लगे आग बुझाने के उपकरणों की मियाद खत्म हो चुकी है। प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने कहा सोमवार को ही दोनों कालातीत फायर स्टिंग्युशर बदलवा दिए जाएंगे।
इमरजेंसी के पास गंदगी, प्याऊ का नल सूखा
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झांसी। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के आसपास बदहाली का आलम है। मुख्य गेट पर कीचड़ और जलभराव रहता है। तीमारदारों की प्यास बुझाने के लिए लगाए नल से पानी टपकता नहीं है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि इमरजेंसी के अंदर और बाहर की समुचित साफ-सफाई के लिए पर्याप्त कर्मचारी लगे हुए हैं। लोगों की प्यास बुझाने के लिए शीतल प्याऊ की व्यवस्था की गई है। मगर, हकीकत इससे एकदम अलग है। इमरजेंसी के मुख्य गेट के पास ही कीचड़ और जलभराव रहता है। जिस पर मच्छर-मक्खी भिनभिनाते रहते हैं। यही नहीं, शीतल प्याऊ के स्थान पर नल तो लगा है मगर उसके पानी नहीं टपकता है। वॉशवेशन के अंदर गंदगी भरी है। हैरानी तो यह कि इमरजेंसी में कॉलेज के जिम्मेदारों का आवागमन रहता है मगर किसी को भी हकीकत नजर नहीं आती है। प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि रविवार को ही गंदगी और पेयजल की समस्या का निदान कराया जाएगा।