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न हेलमेट दिखे, न ट्रिपलिंग रुकी

Mon, 30 Nov 2015 12:40 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। यातायात माह जिस मकसद से शुरू हुआ, वह पूरा नहीं हो सका है। भले ही चालान काटने के आंकड़े संतोषजनक हैं, मगर जनता के बीच संदेश शून्य है। यही वजह है कि अभी भी शहरवासी न हेलमेट लगाने को तैयार हैं और न ही ट्रिपलिंग बंद करने को।
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एक नवंबर को यातायात माह का शुभारंभ पूरे जोश-ओ-खरोश से किया गया। ट्रैफिक पुलिस व संभागीय परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से तय किया कि लोगों को जागरूक करने के लिए पूरे माह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी।

दोनों ही विभागों ने पूरे माह रणनीति पर अमल किया। इसके अलावा सघन वाहन चेकिंग की गई, चालन काटने व वाहनों को सीज करने का नया आंकड़ा भी छुआ। बावजूद अभियान जनता और सरकारी मुलाजिमों में कोई असर नहीं छोड़ सका है। यही नहीं, ‘पहले हम सुधरेंगे फिर सुधारेंगे’ की तर्ज पर शुरू हुआ अभियान पूरी तरह से फ्लॉप हो गया है।
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इसकी वजह यह है कि पूरे माह शायद ही किसी सरकारी विभाग के मुलाजिम और पुलिस कर्मी का चालान काटा गया हो, जबकि ये ही लोग चेकिंग अभियान को मुंह चिढ़ाते रहे। यही वजह है कि पूरे माह चला अभियान जनता को कोई संदेश देकर नहीं जा रहा है।

यदि जिला पुलिस प्रशासन अपने ही मुलाजिमों को शपथ ग्रहण कराकर हेलमेट लगाने के लिए बाध्य करते तो यह निश्चित था कि जनता के बीच अच्छा संदेश जाता। रोड पर जब पुलिस कर्मी हेलमेट लगाकर वाहन चलाते दिखते तो निश्चित जनता मजबूर होकर नियमों के पालन को मजबूर होती।

मगर अफसोस अधिकारियों और रणनीतिकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से पूरे माह की गई मशक्कत का परिणाम भले ही आंकड़ों में प्रभावशाली दिख रहा हो, मगर जनता के बीच संदेश छोड़ने में पूरी तरह से नाकाम रहा है।


चेकिंग अभियान के दौरान जो भी मिला, उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। यह नहीं देखा गया कि कौन सरकारी मुलाजिम है और कौन पुलिस कर्मी। यदि ये लोग भी चेकिंग के दौरान मिलते तो निश्चित उनका भी चालान काटा जाता।
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सोमेन वर्मा, एएसपी झांसी
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