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हेड एक: न शासनादेश, न प्राचार्य की अनुमति, बंद कर दी ओटी

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medical college - फोटो : demo
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 महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज मेें कुछ डॉक्टरों ने मनमानी करते हुए गुड फ्राइडे पर ऑपरेशन थिएटर को बंद रखा। इस वजह से अलग-अलग विभागों के लगभग 30 ऑपरेशन अगले शुक्रवार तक के लिए टल गए। खास बात ये है कि कॉलेज प्राचार्य तक को इसकी सूचना नहीं दी गई। अब मरीजों को कष्ट में ही एक सप्ताह गुजारने पड़ेंगे।
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योगी सरकार ने झांसी मेडिकल कॉलेज के लिए बजट का पिटारा खोल दिया है। पिछले दो साल में ही कॉलेज को 22 से 25 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इन दिनों अस्पताल में दवाएं, इंजेक्शन, उपकरण समेत अन्य सभी संसाधन हैं। भरपूर दवाएं मिलने से मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है मगर कुछ डॉक्टर ही अस्पताल की व्यवस्था बेपटरी करने में जुटे हैं।
शुक्रवार को गुड फ्राइडे के अवसर पर अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने ऑपरेशन थिएटर को सर्वसम्मति से बंद रखा। इस वजह से नेत्र के करीब 12, सर्जरी के छह, ऑर्थोपेडिक्स के पांच, ईएनटी के चार, प्लास्टिक सर्जरी के दो ऑपरेशन नहीं हो सके। इन मरीजों को ऑपरेशन कराने के लिए अब अगले शुक्रवार तक की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। जिनसे कष्ट नहीं झेला जाएगा, उन्हें मजबूरन निजी अस्पताल की तरफ रुख करना पड़ेगा। ऐसे में गरीब मरीजों की एक ऑपरेशन कराने में ही कमर टूट जाएगी। काम से बचने के लिए डॉक्टरों ने जिस संवेदनहीनता का परिचय दिया है, उसका सीधा नुकसान मरीजों को ही झेलना पड़ रहा है। बड़ी बात ये है कि डॉक्टरों ने शुक्रवार को ओटी बंद रखने की जानकारी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक तक को देना जरूरी नहीं समझा। ऐसे में कॉलेज में अनुशासन और नियम का कितना पालन होता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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सिर्फ राष्ट्रीय पर्व पर ही बंद रख सकते
राष्ट्रीय पर्व पर छुट्टी होने के कारण नियमानुसार ऑपरेशन थिएटर सिर्फ इन्हीं दिवसों पर बंद रख सकते हैं। शासनादेश में भी गुड फ्राइडे पर छुट्टी का नियम नहीं है। इसके बावजूद शुक्रवार को ओटी बंद कर मरीजों को परेशानी से जूझने के लिए छोड़ दिया गया।


शुक्रवार को ऑपरेशन थिएटर बंद होने की जानकारी नहीं है। किसी ने मुझे इसकी सूचना नहीं दी। सोमवार को प्रकरण की जानकारी करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. साधना कौशिक, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य।


पहले भी गुड फ्राइडे पर ओटी बंद रहती थी। जब मुझे ओटी प्रभारी का चार्ज मिला था, तब पहले जैसा चल रहा था, वैसे ही ओटी चलाने को कहा गया था। इसलिए प्राचार्य से बात नहीं हो पाई। - डॉ. सूर्यप्रकाश, प्रभारी अधिकारी ओटी।
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