झांसी। कोरोना वायरस के कहर से पूरी दुनिया कांप रही है। इसके बावजूद देश में 400 जिलों की सीमाओं में यह महामारी दाखिल तक नहीं हो पाई। इसमें झांसी मंडल भी शामिल है। इसके पीछे का अहम कारण क्षेत्र का जनसंख्या घनत्व भी कम होना है। मंडल के जनपदों का प्रदेश की तुलना में 50 फीसदी कम जनसंख्या घनत्व है। इसके अलावा समय रहते बाहर से आने वाले लोगों को क्वारंटीन करने का भी असर दिखा है।
कोरोना वायरस संक्रामक रोग है जो कि एक से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक कोरोना संक्रमित 24 घंटे में 100 लोगों को अपना शिकार बना सकता है। कोरोना पीड़ित के खांसने, छींकने और थूकने से मुंह से निकलने वाले कण दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं। जब देश में मामले बढ़ने लगे तो सरकार ने लॉकडाउन कर दिया। लॉकडाउन का उद्देश्य ही है कि लोग एक-दूसरे के संपर्क में न आएं।
अब तक देश के 400 जिलों की सीमाओं में कोरोना वायरस घुस तक नहीं पाया है। इन जिलों में झांसी मंडल के ललितपुर, जालौन और झांसी शामिल हैं। इसका बड़ा कारण जनसंख्या घनत्व का भी कम होना है। मंडल के तीनों ही जिलों में उत्तर प्रदेश के मुकाबले 50 फीसदी कम जनसंख्या घनत्व है। यह घनत्व जितना कम होता है, लोगों के बीच का दायरा उतना ही अधिक होता है। वहीं, शहर और ग्रामीण इलाकों में समय रहते लोगों को क्वारंटीन करने का भी असर दिखा है।
कम आबादी की वजह से बुंदेलखंड में सिर्फ दो मरीज
बुंदेलखंड में झांसी मंडल के अलावा चित्रकूट मंडल के हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जनपद आते हैं। बुंदेलखंड में बांदा को छोड़कर किसी भी जिले कोरोना के मरीज नहीं मिले हैं। बांदा में दो कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। बुंदेलखंड में कोरोना का हमला बहुत कम होने का कारण कम आबादी है। यहां के महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर प्रदेश के सबसे कम आबादी वाले जिलों में शामिल हैं।
ये हैं आंकड़े
उत्तर प्रदेश का जनसंख्या घनत्व: 829 व्यक्ति, आबादी 20 करोड़
झांसी का जनसंख्या घनत्व: 400 व्यक्ति, आबादी 20 लाख
जालौन का जनसंख्या घनत्व: 370 व्यक्ति, आबादी 17 लाख
ललितपुर का जनसंख्या घनत्व: 240 व्यक्ति, आबादी 12.22 लाख
(नोट: जनसंख्या घनत्व व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर में 2011 की जनगणना अनुसार)