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नियम रहे ‘कराह’, डॉक्टर बेपरवाह

Wed, 15 May 2019 12:42 AM IST
देवेंद्र कुमार अमर उजाला ब्यूरो
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medical collage, jhansi - फोटो : demo
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं रुक रहा है। ताजा मामला मॉड्यूलर ओटी का है। मॉड्यूलर ओटी के मानकों को ताक पर रखकर एक के बजाए दो टेबल डालकर ऑपरेशन किए जा रहे हैं। जबकि, ये पूरी तरह नियम विपरीत है। इससे मरीजों में संक्रमण का खतरा बना रहता है। कभी भी किसी मरीज की जान सांसत में पड़ सकती है। इससे बेपरवाह कुछ विभागों के डॉक्टर धड़ल्ले से कोटा पूरा करने के लिए मरीजों के ऑपरेशन कर रहे हैं।
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मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन ने मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो, ईएनटी, गायनी, सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, आई विभागों के ऑपरेशन थिएटर को मॉड्यूलर बनवाया है। मॉड्यूलर ओटी में मरीजों को संक्रमण फैलने का खतरा न के बराबर होता है। हाईटेक सुविधाएं होने से सर्जरी में कम समय लगता है। सुविधाएं मिलने से डॉक्टरों को भी ऑपरेशन में सहूलियत होती है। शासन की अच्छी मंशा को अब यहां के कुछ चिकित्सक ही चौपट करने में जुटे हैं। मॉड्यूलर ओटी के मानकों को ताक पर रखकर कुछ विभागों ने अपने यहां दो ओटी टेबल रख दी हैं। ऐसे में मरीजों में क्रॉस इंफेक्शन फैलने का खतरा बना हुआ है। इससे हर समय मरीज की जान पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इससे बेपरवाह कुछ चिकित्सक जानबूझकर मरीजों की जान खतरे में डाल रहे हैं।

ये है मॉड्यूलर ओटी की प्रक्रिया
मॉड्यूलर ओटी में सिर्फ एक ही टेबल होती है। उसको भी बीचों बीच रखा जाता है। इस वजह से छत से आने वाले लैमिनर फ्लो द्वारा साफ हवा मरीज के ऊपर सबसे पहले पड़ती है। फिर टकराकर नीचे जमीन की तरफ जाती है। दो ओटी टेबल पड़ने से साफ हवा बीच की खाली जगह वाली जमीन पर पड़ने लगती है। फिर जमीन से टकराकर मरीज पर पहुंचती है।
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जमीन पर पड़े कीटाणु भी हवा के साथ मरीज की तरफ जाने लगते हैं। यदि एक मरीज को संक्रमण है तो दूसरे मरीज को भी हो सकता है। वहीं, एक मरीज का ऑपरेशन खत्म होने के बाद ओटी में एंटी सेप्टिक से पोंछा लगाया जाता है, जिसमें सिर्फ 2-5 मिनट लगाते हैं। मगर दो मेज होने से ये प्रोटोकॉल पूरा नहीं हो पाता, क्योंकि ऐसा बहुत ही कम होता है कि दोनों मरीजों का एक ही समय में ऑपरेशन खत्म हो।

दर्ज कराई जा चुकी आपत्ति
मेडिकल कॉलेज की मॉड्यूलर ओटी के क्यूसीआई (एनएबीएस मूल्यांकन) सत्यापन के दौरान इंस्पेक्टरों ने दो ओटी टेबल देखकर आपत्ति जताई थी और तुरंत ही एक मेज को हटवा दिया था। एनएबीएस के मानक अनुसार ओटी में एक बार में एक मरीज को मिलाकर आठ से अधिक लोग नहीं होने चाहिए। दो टेबल रखी होने के बाद ये आंकड़ा कई बार 12 से भी अधिक हो जाता है। ऐसे में पूरे भारत में किसी भी जगह मॉड्यूलर ओटी में दो मेजें नहीं हैं। सिर्फ महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ही ऐसा अनोखा चिकित्सालय है, जहां मॉड्यूलर ओटी में दो ओटी टेबल रखकर ऑपरेशन किया जा रहा है।


स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल और एमसीआई के नियमानुसार मॉड्यूलर ओटी में सिर्फ एक ही टेबल चलाने का प्रावधान है। यही आदेश सभी विभागों को जारी किया जा चुका है। - डॉ. पारस गुप्ता, मॉड्यूलर ओटी प्रभारी।

सभी विभागों को मॉड्यूलर ओटी में सिर्फ एक ही टेबल रखने का आदेश जारी हो चुका है। कहीं पर भी दो ओटी टेबल नहीं हैं। हो सकता है कुछ विभागों ने एक मेज नहीं हटवाई हो। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस।
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