अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में प्रसव के नौ दिन बाद नवजात बालिका ने सोमवार रात दम तोड़ दिया। जन्म के बाद से उसे बदलने को लेकर विवाद शुरू हो गया था। मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड में उसकी मां के तौर पर दर्ज मोंठ निवासी रीता पत्नी रोहित ने डॉक्टरों पर उसके बच्चे को बदलने का आरोप लगाया था। नवजात बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने उसे रीता को सौंपा।
6 दिसंबर को मोंठ निवासी रीता का मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में प्रसव हुआ था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि रीता को पहले लड़का होने की बात बताई गई लेकिन कुछ समय बाद उसके हाथ में बेटी लाकर दे दी गई। बेटी को देख परिवार के लोग भड़क उठे। हंगामा होने पर मेडिकल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक पहुंच गए। उन्होंने समझाने की कोशिश करते हुए उसे बताया कि उस रात वार्ड में भर्ती सभी महिलाओं को लड़कियां हुईं। वार्ड में कोई लड़का पैदा नहीं हुआ लेकिन रीता एवं उसके परिजन यह बात मानने को राजी नहीं हुए। इसके बाद डीएनए जांच का फैसला हुआ। दोनों के खून के नमूने लिए गए थे। उधर, नवजात बच्ची की हालत नाजुक होने पर उसे बाल रोग विभाग के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करा दिया गया था। यहां सोमवार रात उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची का जन्म समय से पहले हुआ था। इस वजह से उसे ऑक्सीजन के सहारे रखा गया था। एसआईसी डॉ. सचिन माहुर ने कहा कि डीएनए जांच रिपोर्ट आने पर स्थिति साफ हो जाएगी।
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बचने के लिए डॉक्टरों ने कर दी हत्या : रीता
रीता ने बच्ची की मौत के बाद डॉक्टरों पर ही उसकी हत्या करने का आरोप जड़ दिया। रीता का कहना है कि नवजात बच्ची के जिंदा रहने से बच्चा बदलने की बात के खुल जाने का खतरा था। इस वजह से डॉक्टर डरे हुए थे। जानबूझकर नवजात बच्ची का उपचार नहीं किया। रीता का कहना है कि कुछ दिन पहले रविवार को जब वह बच्ची को देखने आई थी तब वह ठीक थी। दूध भी पी रही थी। कुछ घंटे बाद उसकी मौत कैसे हो सकती है। रीता के पति रोहित ने आरोप लगाया कि एक नर्स उससे पैसा लेकर शांत रहने को कह रही थी। वे लोग सिर्फ मानवता के नाते बच्ची का शव लेने आए हैं।